मंगलवार, 5 सितंबर 2017

आप अकसर क्या व्यक्त करते हैं - खेद या आभार


वंदना बाजपेयी 

मृत व्यक्ति को किसी जीवित व्यक्ति से अधिक फूल मिलते हैं क्योंकि खेद व्यक्त करना आभार व्यक्त करने से ज्यादा आसान है - ऐनी फ्रैंक 

                                        वो मेरा स्टूडेंट था | तकरीबन १० साल बाद मुझसे मिलने आया था | अभी क्या करते हो ? पूछने  पर उसने सर झुका लिया  , केवल चाय की चुस्कियों की गहरी आवाजे आती रहीं | मुझे अहसास हुआ की मैंने कुछ गलत पूँछ लिया है |
माहौल को हल्का करने के लिए मैं किसी काम के बहाने उठ कर जाने को हुई तभी उसने चुप्पी तोड़ते हुए कहा , " एक दुकान संभालता  हूँ ,  बस गुज़ारा हो जाता है | " फिर सर झुकाए झुकाए ही बोला ,"मुझे खेद हैं |  काश ! मैंने समय पर आप की सलाह मान ली होती तो आज मेरी तकदीर कुछ और होती | " 

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कोई बात नहीं |जहाँ हो अब आगे बढ़ने का प्रयास करो |  हालांकि जब तुम मुझसे मिलने आये थे तो मुझे आशा थी की तुम मेरी सालाह के लिए आभार व्यक्त करने आये हो |"मेरे सपाट उत्तर के बाद पसरा मौन  उसके जाने के बाद भी मेरे मन में पसरा रहा |



                                                  वो मेरा ब्रिलियेंट स्टूडेंट था | पर जैसे - जैसे क्लासेज आगे बढ़ी वो पढ़ाई से जी चुराने लगा | मैंने कई बार उसे समझाने का प्रयास किया की मेहनत ही सफलता का मूलमंत्र है | पर वो मेहनत  से जी चुराता रहा | स्कूल बदलने के बाद मेरा उससे संपर्क नहीं रहा | आज आया भी तो खेद व्यक्त करने के लिए |


 जीवन की कितनी बड़ी विडंबना है की हम सही समय पर सही काम नहीं करते और खेद व्यक्त करने के लिए बहुत कुछ बचा कर रखते हैं |

न सिर्फ कैरियर के मामले में बल्कि आपसी रिश्तों में , लोक व्यवहार में | कितने लोग अपने बीमार रिश्तेदारों से आँख बचाते रहते हैं और समय निकल जाने पर खेद व्यक्त करते हुए कहते हैं की ," आप ने तो हमें बताया ही नहीं |" उस समय बताते तो हम ये ये ये कर देते | सड़क पर गरीब ठंड  से मर रहा है , हममे से कितने उसे अपने घर के एक्स्ट्रा कम्बल दे देते हैं , अलबत्ता उसके मरने के बाद शोक अवश्य करते हैं की काश हमने तब उसे कम्बल दे दिया होता | बेहतर होता की हम उसे पहले कम्बल दे देते और ईश्वर का आभार व्यक्त करते की उसने हमें इस लायक बनाया है की हम किसी की मदद कर सकें |कई बार तो हम अपने बच्चों के मामले में भी समय रहते लापरवाही करते हैं फिर कहते है | समय का फेर है हम उस समय ध्यान नहीं दिया | उदाहरणों की लम्बी लिस्ट है | 

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                                         क्या आप जानते हैं की ऐसा क्यों होता है | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि  आभार् व्यक्त  करना मेहनत मांगता है | आभार व्यक्त करना समय पर तीमारदारी मांगता है , आभार व्यक्त करना  अपने अहंकार को कम करना मांगता है , आभार व्यक्त करना समय का सदुप्रयोग मांगता है | ... खेद व्यक्त करना आसान राह है  पर यह एक ऐसी राह है जिसकी कोई मंजिल नहीं है | तमाम सुडा , कुडा और वुडा हमें जहाँ हैं वहीँ पर रोक कर रखते हैं |


मंजिल सदा सही समय पर सही काम करने वालों को मिलती है |

आप अक्सर क्या व्यक्त करते हैं - खेद या आभार 


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