मंगलवार, 8 अगस्त 2017

रेप के घाव






@@@रचयिता----रंगनाथ दुबे। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर।

थाने पे-------- एक गरीब की बिटिया, अपनी सलवार उतारे--------- जगह-जगह हुये रेप के घाव दिखा रही है। दरोगा----------
बार-बार थप थपाके देख रहा, दाँत और नाखून चुभे--------- उरोजो को बार-बार। लड़की सिहर उठी---उसी रेप के छुअन कासा, ऐहसास हुआ उसे! वे समझ गई आँख भर-भरा आई उसकी, कि अब एक रात और चीखेगी थाने पे, फिर हरे हो जायेंगे--------------- ना भरने के लिये उसकी उरोजो पे ताजिंदगी, एै,रंग-----------ये रेप के घाव।


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