रविवार, 6 अगस्त 2017

एक राजकुमारी की कहानी



मित्रों , मैं बचपन में कहानी में सुना करती थी | एक राजकुमारी की  , जैसा की राजकुमारियों की कहानी में होता है | वो बहुत सुन्दर थी | बिलकुल परी  की तरह और जब हंसती तो उसके सुन्दर मुख की शोभा सौ गुनी बढ़ जाती | हां वो  बहुत संवेदनशील भी बहुत थी  | किसी की जरा सी बात से उसका मन द्रवित हो जाता |घंटों रोती उसका दुःख दूर करने का प्रयास करती | 



जाहिर है किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए ये तो सामान्य बात है | अब असामान्य बात ये थी की जब वो रोती थी तो मोती झरते थे , हंसती थी तो फूल | यहाँ से उसकी मुसीबत शुरू हुई | ये  बात पूरे राज्य में जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी |  अब तो लोग उससे मिलने आते और बात बिना बात उसे रुला दिया करते |फिर मोती  बटोर कर ले जाते |  हंसाने वाले दो एक ही होते | आप सोंच रहे होंगे ऐसा क्यों ? कारण स्पष्ट था | . फूल तो हर जगह मिल जाते हैं  पर मोती तो बहुत प्रयास से बनते हैं और उससे ज्यादा प्रयास से मिलते हैं |रोज - रोज रोने से राजकुमारी परेशान रहने लगी | वो भी हँसना चाहती थी खिलखिलाना चाहती थी | पर कैसे | 


एक दिन एक साधू उस राज्य में आया | राजकुमारी ने उससे मिलने का निश्चय किया | राजकुमारी ने साधू के पास पहुँच कर अपनी समस्या बतायी | साधू उसकी समस्या सुन कर बोला ," तुम रोया मत करो , सिर्फ हंसा करो | हाँ लोगों की मदद अवश्य करो पर आँसूं एक न निकले | स्वाभाव में परिवर्तन पर ये मोती सूखने लगेंगे और निकलना भी बंद हो जाएगे | 



राजकुमारी ने साधू की सलाह पर अमल किया | अब वो हँसती , खूब हँसती , लोगों की मदद भी करती पर रोती बिलकुल भी नहीं | सारा राज्य खुशबु वाले रंग बिरंगे फूलों से भर गया | पूरा वातावरण खुशनुमा हो गया | लोग खुश थे | अब कोई उसे रुलाने नहीं आता | क्योंकि सबकों पता था की अब राजकुमारी को रुलाने से क्या फायदा | न वो रोएगी न ही मोती निकलेंगे | 





friends ,  ये कहानी प्रतीकात्मक है | ये कहानी अति संवेदनशील लोगों के ऊपर है |  जिन्दगी के अनुभव सिखाते हैं की  अगर हमारे रोने से किसी को फायदा हो रहा है तो वो रुला - रुला कर ही मार डालेगा | आस - पास नज़र डालिए तो पायेंगे की की  लोग अति संवेदनशील  लोगों का अक्सर लोग फायदा उठाते हैं | सिम्पैथी ले कर अपना काम निकलवाते हैं | किसी की मदद करना अच्छी बात है पर इस बात का ध्यान रखे की कोई हमारा फायदा न उठा पाए | 



बेहतर है हँसने और रोने दोनों में फूल ही झरे मोती बिलकुल नहीं |

वंदना बाजपेयी 

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