बुधवार, 5 जुलाई 2017

" ग्रीन मैंन" विजय पाल बघेल - मुझे बस चलते जाना है......


    प्रेषक -प्रदीप कुमार सिंह 


पर्यावरण और जीवन का अनोखा संबंध है आज के समय में पर्यावरण का ध्यान रखना हर किसी की जिम्मेदारी और अधिकार होना चाहिए , विशेषकर आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण बहुत जरूरी है ।पर्यावरण संरक्षण और जल वायु परिवर्तन ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया हुआ है । इस समस्या से उबरने के लिए पूरी दुनिया को एक होने की जरूरत है, और इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं ग्रीन मैन के नाम से विख्यात पर्यवरण विद विजय पाल बघेल । पेड़ों के दर्द को अपने हृदय में महसूस करने और उनके संरक्षण में लगे ग्रीन मैन विजयपाल बघेल से  वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार शुक्ला ने बातचीत की प्रस्तुत आलेख उसी बातचीत पर आधारित है...


 हाथरस उत्तर प्रदेश की जमीन पर एक किसान परिवार के घर पर जन्म लेने  वाले इस बालक का बचपन से ही रुझान पेड़-पौधों की ओर था। ,उन्हें संस्कार तो अपने दादा राम बघेल जो की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे ,से प्राप्त हुए बालक के हाव-भाव और बातों से ही माता रामकली बघेल और पिता रामप्रसाद बघेल को यह एहसास हो चला था कि मेरा पुत्र सामाजिक उत्थान के लिए जीवन में जरूर कुछ ना कुछ करेगा और यह बात सत्य भी साबित हुई । अपने जीवन मे अब तक  देश और दुनिया में पांच करोड़ से अधिक पेड़ लगाकर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने वाले विजयपाल ग्रीन मैन के नाम से जाने गए ।
    पर्यावरण संरक्षण की वह जिद्द  जो लोगों की प्रेरणा बन गई अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट लीडर ए पी जे अब्दुल कलाम अवार्ड ,वन विभूति, वन्यजीव प्रतिपालक ,ग्रीन अम्बेसडर, वृक्षमित्र ,प्राणी मित्र जैसे तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय  पुरस्कार  प्राप्त करने वाले विजयपाल बघेल बहुत ही शांतिप्रिय और सरल स्वभाव वाले हैं हमेशा हरे रंग के कपड़े पहनने वाले विजयपाल बघेल कहते हैं कि इन कपड़ों में खुद को इस पर्यावरण में समाहित पाता हूं जो मुझे आनंदित करता है ।पृथ्वी के हर कोने में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को संचालित करने वाले ग्रीन मैन बहुत ही गर्व के साथ बताते हैं कि मेरे जीवन का सर्वाधिक   आनंदमय छण वह था जब देव भूमि ऋषिकेश के गंगा तट पर परमपूज्य स्वामी चिदानंदसरस्वती मुनि जी महाराज के दिव्य सानिध्य मे  छत्तीसगढ़  के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमण सिंह द्वारा सम्मानित किया गया और जब मेरे हरित महागुरु ने हरित ऋषि के रूप में दीक्षा प्रदान कर  रुद्राक्ष का पौधा तथा माला पहनाकर हरित आशीर्वाद प्रदान किया था ।



 बहुत ही चिंतित होते हुए वह बताते हैं कि हमारे सांसों की डोर पेड़ों से बंधी हुई है इसके बावजूद हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति बहुत गंभीर नहीं लगते। वह बताते हैं कि विश्व मे  इस समय 10 अरब पेड़ हर साल लगाए जाते हैं और 20 अरब पेड़ काट दिए जाते हैं मतलब वृक्षारोपण से ज्यादा पेड़ों की कटान हो रही है और यही पर्यावरण असंतुलित होने का सबसे बड़ा कारण है। हम जब तक पर्यावरण संरक्षण को अपनी आदत नहीं बना लेते तब तक हालातों में सुधार आने  वाला नहीं है बातचीत में वह बताते हैं कि विश्व में आज एक आदमी पर 22 पेड़ है जबकि भारत में एक आदमी पर 21 पेड़ हैं और यह संख्या 33 होनी चाहिए वह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में एक आदमी पर मात्र 5 पेड़ हैं जबकि जिले में एक आदमी पर केवल दो से तीन पेड़ है जिंदा रहने के लिए प्रति  मनुष्य 30 पेड़ तो जरूरी है हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति काफी सचेत होना पड़ेगा हम अगर हर बच्चे के जन्म के अवसर और उसके हर संस्कार के अवसर पर तथा  राष्ट्रीय और सामाजिक पर्वों पर वृक्षारोपण की परंपरा को कायम कर ले तो काफी हद तक स्थित सुधर सकती है अन्यथा हम सभी को आगे आने वाले समय में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा ।

      वह बताते हैं कि आजकल सर्दियों में भी गर्मियों का एहसास मौसम का बदलता चक्र सब कुछ पेड़ों के होते विनाश के कारण ही हो रहा है और हम अगर इसे सरकार और संस्थानों का काम समझेंगे तो भला होने वाला नहीं है । इसके लिए हमे  खुद जागरूक होना पड़ेगा वह बताते हैं की अध्यात्मिक वृक्षारोपण अधिक से अधिक करना चाहिए जिससे जिसमें बरगद ,पीपल, अशोक ,बेल ,आंवला आदि  पेड़ों को  अधिकता से रोपित  करना चाहिए बातचीत में आप बताते हैं कि सृष्टि को संचालित करने वाले घटकों में वृक्ष संपदा आधार है और साथ ही अध्यात्म का केंद्र बिंदु भी जो पूरे भूमंडलीय घटनाचक्र पर नियंत्रण करती आ रही है और इसी कारण हमारे ग्रह नक्षत्र तथा राशियां वृक्षों से प्रभावित होती हैं और जो वृक्ष जिस ग्रह नक्षत्र एवं राशि को प्रभावित करता है उसी वृक्ष को पौराणिक मान्यताओं के आधार पर उस का प्रतिनिधित्व वृक्ष माना गया है जिसके रोपण करने से ग्रह नक्षत्र तथा राशि का दुष्प्रभाव खत्म होता है ।इसीलिए वह कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपना जन्मदिन तो राशि वृक्ष लगाकर ही मनाना चाहिए वह वृक्षारोपण को अध्यात्म से जोड़ते हुए पंचवटी वाटिका, नक्षत्र उपवन, गृह वाटिका और राशि वृक्ष के सिद्धांत का विवरण देते हैं पर्यावरण संरक्षण को पूर्ण रूप से अपने जीवन का सिद्धांत बना लेने वाले ग्रीन मैन विजयपाल बघेल का जीवन वास्तव में एक प्रेरणा मय मिशाल है अगर हम उनकी कही किसी एक बात का भी अनुसरण कर लेते हैं तो स्थित बहुत बेहतर हो जाएगी फिलहाल विजयपाल बघेल अपनी मस्त चाल से वृक्षारोपण को एक अभियान की तरह मन मे समाहित कर अपना सफर अनवरत जारी रक्खे है।

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