मंगलवार, 18 जुलाई 2017

लली


मिताली ने डाइनिंग टेबल पर अपनी सारी फाइलें  फैला ली और हिसाब किताब करने लगी | आखिर गलती कहाँ हो रही है जो उसे घाटा हो रहा है | कुछ समझ में नहीं आ रहा है | एक तो काम में घाटा ऊपर से कामवाली का टेंशन | महारानी खुद तो गाँव चली गयीं और अपनी जगह किसी को लगा कर नहीं गयीं | पड़ोस की निधि से कहा तो है की अपनी कामवाली से कह कर किसी को भिजवाये | पर चार दिन हो गए अभी तो दूर – दूर तक कोई निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं | आखिर वो क्या – क्या संभाले ? अपने ख्यालों को परे झटक कर मिताली फिर हिसाब में लग गयी | तभी दिव्य कमरे में आये | उसे देख कर बोले ,” रहने दो मिताली तुमसे नहीं होगा | ये बात मिताली को तीर की तरह चुभ गयी | दिव्य को देख कर गुस्से में चीखती हुई बोली ,” क्या कहा ? मुझसे नहीं होगा ... मुझसे , मैं MBA हूँ | वो तो तुम्हारी घर गृहस्थी के चक्कर में इतने साल खराब हो गए , वर्ना मैं कहाँ से कहाँ होती | वो ठीक हैं मैडम पर आपके इस प्रोजेक्ट के चक्कर में मेरा बैंक बैलेंस कहाँ से कहाँ जा रहा है | दिव्य ने हवा में ऊपर से नीचे की और इशारा करते हुए कहा | मिताली कुछ कहने ही वाली थी की तभी बाहर से आवाज़ आई ,” लली “




मिताली ने बाहर जा कर देखा | कोई 52- 55 वर्ष  की महिला खड़ी  थी | मोटी स्थूलकाय देह , कपड़ों से उठती फिनायल की खुशबू से मिताली को समझते देर न लगी की ये काम वाली है जिसे निधि ने भेजा है | इससे पहले की मिताली कुछ कहती वो ही मुस्कुराते हुए बोल पड़ी ,”सुनो लली ,  कमला नाम है मेरा , निधि मेमसाहब ने बताया था की आप को कामवाली की जरूरत है |


मिताली : ( उसे देखते हुए ) हां पर मुझे कम उम्र लड़की चाहिए |

कमला : देखो लली , काम तो हम लड़कियों से ज्यादा अच्छा करते हैं | एक बार करा कर देखोगी तब पता चलेगा |

मिताली : देखो मेरा समय बर्बाद मत करो , तुम्हारा शरीर इतना भारी है तुम कैसे पलंग के नीचे से कूड़ा निकाल पाओगी |

कमला : अरे लली , उसकी चिंता न करो , हम सब कर कर लेंगें |

मिताली : कैसे?

कमला : अब का बताये लली ,करा के तो देखो

मिताली : नहीं कराना , मुझे लड़की ही चाहिए बस |

कमला : देखो लली ,

मिताली : ( गुस्से में उसकी बात बीच में ही काटते हुए ) क्या , लली , लली लगा रखा है | बड़े – बड़े बच्चे हैं मेरे | अब कोई कम उम्र लली थोड़ी न हूँ मैं |

कमला : आश्चर्य से उसे देख कर बोली , “ का बातावें धोखा खा गए | अब आप को देख कर कोई कह सकता है की आप के बड़े – बड़े बच्चा  हैं | लड़की सी लगती हैं उमर का  तो तनिक पता ही नहीं चलता है | भाग हैं , भगवान् की देन है |

उसके शब्दों ने जादू सा असर किया | अब मिताली थोड़ी ठंडी पड़ गयी | धीरे से बोली , “ कितना लोगी ?’

कमला : सफाई बर्तन का पंद्रह सौ

मिताली :पंद्रह सौ , अरे ये तो बहुत ज्यादा हैं | पहले वाली तो बारह सौ लेती थी |  इससे अच्छा तो बर्तन मैं ही कर लूं और तुम सफाई कर लो  |मिताली घाटे का गणित लगाते हुए बोली |

कमला : क्या  लली , अपने हाथ देखे हैं | कितने मुलायम हैं | सबके कहाँ होते हैं ऐसे हाथ |  भगवान् बानाए रखे | कया  , २ ००- २५०  रुपया के लिए इन्हें भी कुर्बान कर दोगी |

मिताली अपने हाथ देखने लगी | सच में कितने मुलायम हैं | तभी तो दो नंबर की चूड़ियाँ भी झटपट चढ़ जाती है | सहेलियां भी तो अक्सर तारीफ करती हैं | मिताली ने अपने हाथ देखते हुए स्वीकृति में सर हिलाया | खुश होते हुए कमला बोली ,” ठीक है लली , कल से आयेंगे | फिर से लली ,इस बार मीताली  के स्वर में प्यार भरी  झिडकी थी | कमला हँसते हुए बोली ,” अब हम तो लली ही कहियें | जैसे दिखती हो , वही कहेंगे | और दोनों हँस पड़ीं |

                           कमला ने काम पर आना शुरू कर दिया | और मिताली उसी प्रोजेक्ट , हिसाब , किताब , गुणा  – भाग में लग गयी | वो घाटे  से उबर नहीं पा रही थी | क्या दिव्य सही कहते हैं की उसे बुकिश नॉलिज है | प्रैक्टिकल नहीं | कहीं , कुछ तो है गलत है | पांच – छ : लोगों की छोटी सी कंपनी को वो संभाल  नहीं पा रही थी | सबके इगो हैंडल करना उसके बस की बात नहीं थी | पैसा वो लगाये , काम वो सबसे ज्यादा करे और मनमर्जी सबकी सहे |  हर कोई अपनी वाहवाही चाहता था |  दिव्य कहते हैं की सब का इगो हैंडल करना ही सबसे बड़ा हुनर है | नहीं तो कम्पनी ही टूट जायेगी |फिर बचेगा क्या ? कैसे करे वो ? और अब तो दिव्य ने भी पैसे देने से इनकार कर दिया है  | मिताली हारना नहीं चाहती थी |उसने लोन लेने का मन बनाया | सारे कागज़ तैयार किये | पर MBA की डिग्री की फोटो कॉपी रह गयी | मिताली डिग्री की फोटो कॉपी कराने बाज़ार के लिए निकली |


                             रास्ते में पार्क पड़ता है | जहाँ काम वालियां अक्सर झुण्ड में बैठ कर बतियाती हैं | उसे दूर से कमला बैठी दिख गयी | कमला ने उसे नहीं देखा वो बातचीत में मशगूल थी |  पार्क के पास पहुँचते – पहुँचते मिताली को उनकी सपष्ट आवाज़े सुनाई देने लगीं | एक बोली ,” कमला चाची इस उम्र में भी तुम कैसे इतने घर पकड़  ली हो | हमें तो 40 की होने के बाद से ही काम नहीं मिलने लगा | सब ओ लड़की चाहिए | जो पलंग के नीचे से कूड़ा निकाल दे | स्टूल पर चढ़ कर पंखा साफ़ कर दे | अब भारी शरीर से ये काम तो हमसे होने से रहा | कमला खुश होते हुए बोली ,” यह तो हमारा काम नहीं व्यवहारिक ज्ञान हैं | हमें भी पहले कोई काम नहीं देता था | हमारा भारी  शरीर और उम्र के कारण हर कोई मना कर देता था | फिर हमने ही तरीका निकाला | दरसल इसमें हमारे काम का नहीं शब्दों का हुनर है | अब ये  बड़े घरों की औरतें ,इन्हें कम उम्र दिखने का शौक होता है | हमारी तनख्वाह से चार गुना तो ब्यूटी पार्लर पर चढ़ाती हैं | तो हम तो इसी बात का फायदा उठाते हैं | उसके लिए एक ही शब्द है “ लली “  | ये कह दो की वो तो बहुत कम उम्र लड़की लगती हैं ,  तो देखो कैसे सब खुश हो जाती हैं | फिर काम पर गौर नहीं करती | हां महीने में एक आध बार अपनी बेटी या बहू को ले जाकर ठीक से सफाई करवा डेट हैं | काम भी ज्यादा पैसा भी ज्यादा और कोई खिच – खिच नहीं | उनके अहम् को संभालना है | ये काम करता है बस एक शब्द |


और वो शब्द हैं “ लली “  कहते हुए सब एक साथ हँस पड़ीं |



               मिताली को पसीना आ गया | उसके कानों में दिव्य के शब्द गूंजने लगे कंपनी में सब का इगो हैंडल करना ही सबसे बड़ा हुनर है | उसके हाथ से MBA  की डिग्री छूटने लगी | 

 वंदना बाजपेयी


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