शनिवार, 15 जुलाई 2017

शैतान का सौदा



एक बार  एक पादरी रास्ते पर टहल रहा था। उसने एक आदमी को देखा, जिसे अभी-अभी किसी नुकीले हथियार से मारा गया था। वह आदमी अपने चेहरे के बल रास्ते पर गिरा हुआ था, सांस के लिए संघर्ष कर रहा था और दर्द से कराह रहा था। पादरियों को हमेशा यह सिखाया जाता है कि करुणा सबसे बड़ी चीज होती है, प्रेम का मार्ग ही ईश्वर का मार्ग है। स्वभावतः वह उस आदमी की तरफ दौड़ा। उसने उसे सीधा किया और देखा तो वह खुद शैतान ही था। वह अचंभित रह गया, डर कर तुरंत पीछे की तरफ हट गया।

शैतान उससे प्रार्थना करने लगा, कृपया मुझे अस्पताल ले चलो! कुछ करो! पादरी थोड़ा हिचकिचाया और बोला, तुम तो शैतान हो, तुम्हें भला मुझे क्यों बचाना चाहिए? तुम ईश्वर के खिलाफ हो। भला मैं तुम्हें क्यों बचाउं? तुम्हें तो मर ही जाना चाहिए। पूरा पादरीपन शैतानों को भगाने के संबंध में है और ऐसा लगता है कि किसी ने ऐसा करके सचमुच एक अच्छा काम किया है। मैं तुम्हें बस मर जाने दूंगा।शैतान ने कहा, ‘ऐसा मत करो। जीसस तुमसे कह गए हैं कि अपने शत्रु से भी प्रेम करो और तुम जानते हो कि मैं तुम्हारा शत्रु हूं। तुम्हें जरूर मुझसे प्रेम करना चाहिए।फिर पादरी ने कहा, ‘मुझे पता है, शैतान हमेशा धर्म ग्रंथों से उदाहरण देते हैं। मैं इस चक्कर में पड़ने वाला नहीं हूं।

तब शैतान बोला, ‘मूर्खता मत करो। अगर मैं मर गया, तो फिर चर्च कौन आएगा? ईश्वर को कौन खोजेगा? फिर तुम्हारा क्या होगा? ठीक है, तुम ग्रंथों की नहीं सुनते हो, लेकिन अब मैं धंधे की बात कर रहा हूं, बेहतर होगा कि तुम सुनो।

पादरी समझ गया कि वह ठीक कह रहा है। जब शैतान नहीं होंगे, तो चर्च कौन आएगा? लोग चर्च और मंदिर ईश्वर के कारण नहीं जाते, बल्कि इसलिए जाते हैं क्योंकि उन्हें शैतान की चिंता होती है। अगर शैतान मर जाता है, फिर पादरी का क्या होगा? इससे धंधे की अक्ल आई। उसने तुरंत शैतान को अपने कंधों पर डाला और उसे अस्पताल ले गया

दोस्तों , धर्म के नाम पर हम ज्यादातर पाखंड में जीते हैं  | धर्मिक  होना व धर्म  का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना दो अलग - अलग बातें हैं | बेहतर है की हम इस अंतर को समझे | जो कट्टरता अपनी दुकान चलने के लिए इन  तथाकथित पाखंडी  धर्म गुरुओं द्वारा परोसी जा रही है | उसका विरोध करें | 







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