शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

मकान नंबर 13



 प्रतिभा  पांडे 

उस  पॉश  कॉलोनी   के ब्लाक 2  मकान नंबर 13  में आज सुबह से ही मीडिया वालों और पुलिस का आना जाना लगा था I  ब्लाक 2 के बाकी  सारे मकानों में आज सन्नाटा था  , चिड़िया भी बाहर नहीं दिख  रही थी I पार्क  में भी सन्नाटा  था I
और दिनों इसका उल्टा होता था I इस ब्लाक में सुबह से रौनक हो जाती थी I  कारें  धुलती थीं ,पार्क में योग, ध्यान, जॉगिंग और मंदिर में भजन चलते रहते थे,  और मकान न  13 में सन्नाटा  रहता था I

एक महीने पहले इस मकान में  कोई लोग रहने आये थे I  पेपर वाला, दूध वाला  या  बाई ,कोई नहीं आता  था इस घर में I  पार्क में , मंदिर में   लोगों के  बीच   मकान  न  13  को  लेकर  सुगबुगाहट  और कानाफूसियाँ  तो  होती रहती थीं , पर  संभ्रांत  लोगों की कॉलोनी थी ,कोई पचड़े  में क्यों  पड़ता I

और  ये  आज का दिन  , गुप्ता  जी ने  फ़ोन लगाया  शर्मा जी को ,
" देखा  तुमने  T,V, में ? एक महीने  से  बंद  कर रखा था  बेचारी उस  नाबालिग  बच्ची को इन गुंडों ने  उस मकान  में I क्या क्या  किया  होगा  बेचारी के साथ I दम  तोड़ दिया  बेचारी ने अस्पताल में I  यार  सोचता  हूँ क्या होगा इस देश का I  अरे  छोड़  ये , और बता , वो जो अगले  हफ्ते से आध्यात्म  शिविर  लगने वाला है , उसमे  नाम  लिखवा  लिया ना ?"
और    संभ्रांत  लोगों  की  बात चीत  चलती रही.........

मकान  न  13  को  पुलिस  ने सील  कर  दिया , और  वहां फिर से  सन्नाटा  हो गया



प्रतिभा  पांडे  

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