मंगलवार, 27 जून 2017

नहीं पता था मेरी जिद सुर्खियों में छाएगी - प्रियंका भारती, सामाजिक कार्यकर्ता


           


  प्रियंका तब 14 साल की थीं। यह बात 2007 की है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली यह बच्ची उन दिनों पांचवी कक्षा में पढ़ रही थी। गांव की बाकी लड़कियों की तरह उसकी भी शादी हो गई। मां और सहेलियों का साथ छूटने के ख्याल से वह खूब रोईं। मां ने समझाया, क्यों चिंता करती हो? अभी तो बस शादी हो रही है, गौना पांच साल बाद होगा। तब तक तुम हमारे साथ ही रहोगी। मन को तसल्ली मिली। शादी के दिन सुंदर साड़ी और गहने मिले पहनने को। बहुत अच्छा लगा प्रियंका को। दो दिन के जश्न के बाद बारात वापस चली गई। प्रियंका खुश थीं कि ससुराल नहीं जाना पड़ा।


            शादी के बाद पढ़ाई जारी रही। इस बीच मां उन्हें घर के कामकाज सिखाने लगीं। देखते-देखते पांच साल बीत गए। अब वह बालिग हो चुकी थीं। गौने की तैयारियां शुरू हो गईं। आखिर विदाई की घड़ी आ ही गई। यह बात 2012 की है। एक छोटे समारोह के बाद उनकी विदाई हो गई। ससुराल पहुंचीं, तो अगली ही सुबह एक बड़ी दिक्कत से सामना हुआ। उन्होंने झिझकते हुए सास से पूछा, मां जी, शौचालय जाना है। सास ने कहा, कुछ देर रूको, मैं चलती हूं तुम्हारे साथ। उन्हें अजीब लगा। सास उनके साथ कहां जाने की बात कर रही हैं? थोड़ी देर बाद सास के साथ बहू चल पड़ी खेत की ओर। तब जाकर पता चला कि घर में शौचालय नहीं है। पगडंडियों का रास्ता कठिन था। खेतों में पानी भरा था। पगडंडी पर फिसलन काफी ज्यादा थी। सुर्ख लाल साड़ी में लिपटी नई-नवेली बहू राहगीरों के लिए उत्सुकता का विषय थी। 

प्रियंका बताती हैं- मेरे एक हाथ में लोटा था और दूसरे हाथ से मैं घूंघट संभाल रही थी। कई लोग मुझे पलटकर देख रहे थे। मुझे बड़ी शर्म आ रही थी।

            पहली सुबह किसी तरह बीती। उस दिन उन्होंने पति और सास से कई बार कहा, घर में शौचालय बनना चाहिए। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। गांव में शौच के लिए बाहर जाना आम बात थी। ससुराल वालों को शौचालय बनवाने की मांग गैर-जरूरी लगी। इसी तरह दो दिन बीत गए। फिर उन्होंने पति से साफ कह दिया कि उन्हें शौच के लिए घर के बाहर जाना मंजूर नहीं है। प्रियंका बताती हैं, तीसरे दिन मैंने बाहर जाने से मना कर दिया। मेरे पेट में दर्द होने लगा। मैंने तय कर लिया था कि जब तक घर में शौचालय नहीं बनेगा, मैं शोच नहीं जाऊंगी। इस बीच रस्म के मुताबिक उनका भाई ससुराल आया।

प्रियंका अपने सामान की पेटी लेकर भाई के सामने खड़ी हो गईं और बोली- मैं भी चलूंगी तुम्हारे साथ। भाई ने खूब समझाया। ससुराल वालों ने कहा कि गांव में सभी महिलाएं बाहर शौच को जाती हैं, फिर तुम्हें इतनी दिक्कत क्यों हैं?

            मगर प्रियंका ने एलान कर दिया कि जब तक शौचालय नहीं बनेगा, वह ससुराल नहीं लौटेंगी। उधर मायके वालों को बेटी का यूं इस तरह ससुराल छोड़कर आना अच्छा नहीं लगा। मां ने भी कहा कि यह जिद ठीक नहीं है। सबका एक ही सवाल था, अगर तुम्हारी सास और ननद बाहर शौच के लिए जा सकती हैं, तो तुम क्यों नहीं? पूरे गांव में खबर फैल गई कि प्रियंका ससुराल से भाग आई है। कुछ लोग ने यह अफवाह भी उड़ा दी कि इस लड़की का गांव में किसी से प्रेम-प्रसंग है, इसलिए वह अपने पति को छोड़कर भाग आई है। रिश्तेदार ताने मारने लगे।
            मगर प्रियंका जिद पर अड़ी रहीं। इस बीच ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय पर काम करने वाले एक एनजीओ टीम प्रियंका के घर पहुंची। टीम ने उनके कदम की तारीफ करते हुए कहा कि आपने ससुराल छोड़कर बड़ी हिम्मत दिखाई। अगर गांव की हर बहू-बेटी ऐसा फैसला करने लगे, तो हर घर में शौचालय बन जाएगा। उन्होंने घरवालों को भी समझाया कि आपकी बेटी ने ससुराल छोड़कर कोई गलती नहीं की है। उसकी जिद जायज है। एनजीओ ने प्रियंका के ससुरालवालों से संपर्क किया और अपने खर्च पर उनके घर में शौचालय बनावाया। इसके बाद प्रियंका की ससुराल वापसी हुई। इस मौके पर एक बड़ा समारोह हुआ, जिसमें शौचालय का उद्घाटन किया गया। 

प्रियंका बताती हैं, मुझे नहीं पता था कि मेरी जिद सुर्खियां बन जाएगी। जब ससुराल लौटी, तो गांव में भोज हुआ। मुझे मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। ससुराल वाले भी घर में शौचालय बनने से बहुत खुश थे।

            इस घटना के कुछ समय बाद एनजीओ ने उन्हें अपना ब्रांड अंबेस्डर बना लिया। उनकी कहानी पर एक विज्ञापन फिल्म भी बनी, जिसमें प्रियंका को अभिनेत्री विद्या बालन के साथ दिखाया गया। विज्ञापन की शूटिंग के लिए प्रियंका मुंबई गईं। इस समय वह स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। पिछले पांच साल से वह गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को घर में शौचालय बनवाने और बेटियों को पढ़ाने का संदेश दे रही हैं। वह सिलाई केंद्र भी चलाती हैं, जहां महिलाओं को सिलाई की ट्रेनिंग दी जाती है। इस काम में उनके पति भी सहयोग करते हैं।

प्रियंका बताती हैं- अब मेरा एक ही सपना है गांवों में साफ-सफाई रहे, महिलाओं को शौच के लिए बाहर न जाना पड़े और हर बेटी को पढ़ने का मौका मिले।

प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी
साभार: हिन्दुस्तान

संकलन: प्रदीप कुमार सिंह  

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