शुक्रवार, 23 जून 2017

चालाक कबूतर




बहेलिये ने कबूतर पकड़ा तो कबूतर चिल्ला उठे ” हमें छोड़ दो , हमें भी जीने का अधिकार है संविधान में भी लिखा है शायद । ”
बहेलिया हँसा और पिंजरे में रखकर दरवाजा बंद करते हुए बोला ” अबे आज मंदिर निर्माण समिति की बैठक है रात के खाने में जाएगा तू । भगवान के काम में लग रहा जीवन तेरा , सीधा स्वर्ग जाएगा । ”

शाम को जब खटिक ने छुरी लहराते हुए उन्हें पिंजरे से निकाला तो कबेतरों ने चिल्ला चिल्ला कर आसमान सर पर उठा लिया । खटिक झुंझलाया ” तुमलोगों का मरना तो तय है फिर क्यों चिल्ला रहे हो । ”
कबूतरों में से एक बोला ” हम मस्जिद के कबूतर हैं वहीं पले बढे हैं । मरना तो तय है हम जान की भीख भी नहीं मांगते बस इतनी इल्तिजा है की मौत हलाल हो झटके से नहीं । ”
खटिक पेशोपेश में आ गया , फौरन मेजबानों को खबर कर मामला बताया की बहेलिये ने धोखा किया मस्जिद के कबूतर दे गया है । उधर से आदेश आया कबूतरों को दाना पानी देकर छत पर छोड़ दो और अभी चिकन बना लो ।
कुमार गौरव 

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