शुक्रवार, 23 जून 2017

नयी सोंच -कुमार गौरव की लघुकथाएं ( ई - बुक )




                                                       प्रस्तुत है कुमार  गौरव की लघुकथाओ की ई -बुक ,
 नयी सोंच 
 इसमें आप पढेंगे आठ  लघुकथाएं 


1 ..सूखा ...
इलाके में लगातार तीसरे साल सूखा पडा है अब तो जमींदार के पास भी ब्याज पर देने के लिए रूपये नहीं रहे । जमींदार भी चिंतित है अगर बारिश न हुई तो रकम डूबनी तय है । अंतिम दांव समझकर जमींदार ने हरिद्वार से पंडित बुलवाकर बारिश हेतु हवन करवाया । दान दक्षिणा समेटते हुए पंडित ने टोटका बताया कोई गर्भवती स्त्री अगर नग्न होकर खेत में हल चलाये तो शर्तिया बारिश होगी ।

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२ ...मोहसिन की बेवा 
मोहसिन सेना की वर्दी पहने लद्दाख के ग्लेशियर में कहीं दब गया ।
सरकार उसे मरा हुआ नहीं मानती । वो ड्यूटी पर नहीं आता उसकी सैलरी नहीं जाती खाते में । मोहसिन की बेबा रोज एटीएम लेकर जाती है टेलर की दुकान पर । अफजल दोस्त था मोहसिन का , पिन मालूम है उसे । रोज चेक करता है और कुछ रूपये जेब से निकालकर उसके हाथ में रख देता है अभी इतना ही आया है कहकर ।
आज अफजल की बीबी ने पैसे को लेकर हंगामा कर दिया तो अफजल ने कह दिया पैसे नहीं हैं एटीएम में ।
चक्की पर आटा लिए सर झुकाए खड़ी है मोहसिन की बेबा । चक्कीवाला पिसाई मांग रहा है छह किलो का पंद्रह रूपया ।

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३ ...चालाक कबूतर 

बहेलिये ने कबूतर पकड़ा तो कबूतर चिल्ला उठे ” हमें छोड़ दो , हमें भी जीने का अधिकार है संविधान में भी लिखा है शायद । ”
बहेलिया हँसा और पिंजरे में रखकर दरवाजा बंद करते हुए बोला ” अबे आज मंदिर निर्माण समिति की बैठक है रात के खाने में जाएगा तू । भगवान के काम में लग रहा जीवन तेरा , सीधा स्वर्ग जाएगा । ”

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4 ... सूखी रोटियाँ 
चैनल के लिए कहानियों की खोज में कोशी के कछार भटकते भटकते एक बुढिया को देखा जो रोटियां सुखा सुखाकर घर के आंगन में बने एक बडे से मचान पर रख रही थी । उसने बुढिया से इसका कारण पूछा तो मुस्कुरा खर वापस अपने काम में लग गई । स्टोरी न बन पाने के अफसोस के साथ कुछ फोटोज खींचे और मन में सोचा कम से कम ब्लॉग पर जरूर लिखूंगा इस पगली बुढिया के बारे में ।
फिर वो शाम होते ही लौट आया जिला मुख्यालय के अपने होटल पर । अभी खाना खाकर सोने की कोशिश कर ही रहा था कि एडिटर का फोन आया ” नेपाल ने बराज के चौबीसो गेट खोल दिये हैं ,भयंकर तबाही मचाएगी कोशी , काम पर लग जाओ । ”

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5 ... नयी सोंच 

धर्मपरायण परिवार में नई बहू के आगमन के उपलक्ष्य में रामचरितमानस का पाठ एवं विद्वजनों द्वारा व्याख्यान रखा गया । सारा परिवार बाहर व्याख्यान सुन रहा था वहीं सुनसान पाकर किसी ने बहू को दबोच लिया । पलटकर जो देखा तो दूर के रिश्ते का देवर था । नजर मिलते ही उसने कुत्सित ढंग से आंख दबाई ” भौजाई में तो आधा हिस्सा होता ही है । ”
बाहर प्रसंग चल रहा था लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काट दी थी और सूर्पनखा विलाप करती हुई लौट रही थी ।
बहू ने जोर का धक्का दिया और पास पडी फांसुल उठाकर आधा हिस्सा मांगनेवाले उस पुरूष से उसका पुरा पुरूषत्व छिन लिया ।

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६ ... भूख और कवि 
नेताजी ने क्षेत्र में कवि सम्मेलन रखवाया ।
कवि को खबर करवाया शाम को कवि सम्मेलन है अपनी बेहतरीन कविता लेकर पहुँच जाना ।
कवि फूला न समाया । अपने सबसे नये कुरते पाजामें को कलफ किया । संदूक ने निकाला अपनी सहयोग के आधार पर छपी ताजातरीन काव्य संग्रह की प्रकाशक द्वारा दी गई एक मात्र प्रति को और झोले में रख छल दिया सम्मेलन को ।
पत्नी ने आवाज दी ” रोटी तो खालो । ”
कवि गुर्राये तुझे रोटी की पडी है वहाँ मेरा सम्मान होना है , मंत्री जी का कार्यक्रम है भूखे थोडे आने देंगे।
सम्मेलन शुरु हुआ कवि को मंच पर दुशाला ओढाकर सम्मानित किया गया । मंत्री जी कार्यक्रम छोडकर अपने गुर्गौं के साथ गेस्ट हाउस चले गये । कवि ने मंत्री जी की प्रशंसा और अपनी कविताओं के साथ मंच संभाल लिया ।

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७ ... नारी सम्मान 
मॉल में रामायण का मंचन चल रहा था । चलते चलते सीता की राह में एक बडा पत्थर आ गया तो राम ने आगे बढकर लात मारकर पत्थर को रास्ते से हटा दिया । पत्थर पैर लगते ही औरत के रूप में बदल गया । औरत ने अंगडाई ली , कमर सीधी किया और रास्ता छोडकर जंगल की तरफ चल दी ।
लक्ष्मण को बहुत गुस्सा आया वो चिल्लाकर बोले ” एहसानफरामोश औरत तुम श्रीराम के कारण जड से चेतन अवस्था में आई क्या तुम्हें इसके लिए धन्यवाद कहना उचित नहीं लगा । ”

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8 ... दूध भात 

जब दुआरी के कटहल पर कौए ने नीर बनाया तो धनेसरी खूब खुश हुई थी । अब तो बडका समदिया घर के पास ही आ गया । पीरितिया के बापू उहां आने का सोचेगा और कौआ इहां फटाक से उसको खबर कर देगा । केतना दिन हो गया मुंह देखे , पिरितया के जनम में भी नहीं आए थे खाली पैसा भेजवा दिए अब तो पिरितिया घुटन्ना भरने लगी है ।
रोज बरतन बासन के बहाने अंगना में मोरी के पास घंटों बैठी रहती । लेकिन निर्मोहिया एक्को बार भी कांव कांव नहीं करता उसकी तरफ देखकर ।







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