मंगलवार, 27 जून 2017

तुफानों का गजब मंजर नहीं है



सुशील यादव

122२  1222 १22
तुफानों का गजब मंजर नहीं है
इसीलिए खौफ में ये शहर नहीं है

तलाश आया हूँ मंजिलो के ठिकाने
कहीं मील का अजी पत्थर नहीं है

कई जादूगरी होती यहाँ थी
कहें क्या हाथ बाकी हुनर नहीं है

गनीमत है मरीज यहाँ सलामत
अभी बीमार चारागर नहीं है

दुआ मागने की रस्म अदायगी में
तुझे भूला कभी ये खबर नही है




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