सोमवार, 26 जून 2017

चूड़ियाँ ईद कहती है


-रंगनाथ द्विवेदी

चूड़ियाँ ईद कहती है चले आओ----------

कि अब चूड़ियाँ ईद कहती है। भर लो बाँहो मे मुझे, क्योंकि बहुत दिन हो गया, किसी से कह नही सकती, कि तुम्हारी हमसे दूरियाँ---- अब ईद कहती है।


चले आओ--------- कि अब चूड़ियाँ ईद कहती है।
सिहर उठती हूं तक के आईना, इसी के सामने तो कहते थे मेरी चाँद मुझको, तेरे न होने पे मै बिल्कुल अकेली हूं , कि चले आओ-------- अब बिस्तर की सिलवटे और तन्हाइयां ईद कहती है।
चले आओ--------- कि अब चूड़ियाँ ईद कहती है। @@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।

सभी को ईद मुबारक

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें