बुधवार, 31 मई 2017

प्रेम की ओवर डोज



प्रेम का सबसे सही प्रमाण विश्वास है

                  निधि की शादी को चार साल हो गए हैं वह पति के साथ नासिक में रहती है | |उसके पति उसे बहुत प्रेम करतें हैं | उसका दो साल का बेटा है | निधि के माता – पिता निधि की ख़ुशी देख कर बहुत खुश होते हैं | अक्सर बताते नहीं थकते उनके दामाद जी उन्की बेटी से कितना प्रेम करते हैं | जब भी निधि मायके आती है साथ – साथ आते हैं और उसे साथ ही वापस ले जाते हैं | जहाँ भी निधि जाना चाहती है अपना हर काम छोड़ कर उसके साथ जाते हैं | अगर कभी निधि को अकेले मायके आना पड़ता है तो दिन में ६ बार फोन कर के उसका हाल – चाल लेते हैं | ऐसी कौन सी पत्नी होगी जो अपने भाग्य पर न इतराए | किसके माँ – पिता ये सब देख कर गर्व न महसूस करते होंगे |लिहाजा निधि के माता –पिता भी हर आये – गए से उसके भाग्य की प्रशंसा करते | जब निधि भी उपस्तिथ होती तो हँस कर हां में समर्थन करती | धीरे – धीरे ये हँस कर किया गया समर्थन मुस्कुरा कर फिर मौन , फिर भावना रहित समर्थन में बदलने लगा | एक दिन उसकी माँ यूँ ही दामाद जी की तारीफ कर रहीं थी तो निधि फूट – फूट कर रोने लगी ,” बस करो माँ , बस करो , वो मुझे प्यार नहीं करते , मुझ पर शक करते हैं | इसी कारण एक पल भी मुझे अकेला नहीं छोड़ते | बार – बार फोन करके कहाँ हो क्या कर रही हो पूंछते रहते हैं | अब मैं थक गयी हूँ माँ , अब नहीं सहा जाता |

अरे ! चलेंगे नहीं तो जिंदगी कैसे चलेगी

                                                 अब अवाक रहने की बारी माता – पिता की थी | शक्की पति या पत्नी से निभाना बहुत कठिन होता है | बेटी इतना कष्ट सह रही थी पर उन्हें भनक तक नहीं लगी | कैसे लगती ? प्रेम को हम बहुत फ़िल्मी तरीके से लेते हैं | मुझे ये पुराना गीत याद आ रहा है ...


बैठा रहे सैंया नैनों को जोड़े /एक पल अकेला वो मुझको न छोड़े
नहीं कोई जिया को कलेश /पिया का घर प्यारा लगे

बदलाव किस हद तक


क्या हम कभी सोंचते हैं की एक पल अकेला न छोड़ना प्रेम की निशानी नहीं है | ज्यादातर मामलों में प्रेम की इस ओवर डोज के पीछे क्रूर मानसिकताएं छुपी होती हैं | जिनमें शक्की होना , पजेसिव होना या सुपर डोमीनेटिंग होना , होती हैं | अगर शादी के एक साल बाद भी प्रेम की ओवर डोज दिखाई दे रही है तो अपने और अपनी बेटी के भाग्य पर इतराने की जगह मामले की तह तक जाने की जरूरत है | हो सकता है आपकी बेटी , बहन , भांजी , भतीजी की नकली हंसी के पीछे बहुत गहरा दर्द छिपा हो | क्योंकि आजकल ज्यादातर परिवार एकल हैं तो निश्चित तौर पर वो अकेले घुट रही होगी | तब खुल कर बात करने की जरूरत है क्योंकि यह कई बार अवसाद अलगाव या बच्चों की खराब परवरिश के नतीजे ले कर आता है |



14 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 16 अगस्त 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यवाद पम्मी जी

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  2. यही दर्द था रत्ना का -सबसे कट कर अपने व्यक्तित्व को नकार कर जीना मुश्किल होता है ,थोड़ा अवकाश बहुत ज़रूरी है ,पुरुष को मिल जाता है स्त्री छोटी-सी सीमा में घुट कर रह जाती है .

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  3. प्रेम का आधार विश्वास न कि हर समय फ़िक्र सुन्दर एवं विचारणीय आभार "एकलव्य"

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  4. छोटी सी कथा में जीवन का कडवा सच उद्घाटित हुआ है | शक गृहस्थी के लिए विष के समान है | हर समय की फ़िक्र को प्रेम का नाम देना बेहद संकुचित मानसिकता को दर्शाता है | सच है जब प्रेम की अतिरेकता हो तो इसके पीछे के कारण पर दृष्टिपात करना चाहिए कि सचमुच ही ये प्रेम है या एकतरफा तुष्टिकरण की कोई जिद |

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  5. शक किसी भी रिश्ते को दीमक की तरह खोखला कर देता है....
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  6. वहम की दवा तो लुकमान के पास भी नहीं थी !छद्म प्रेम के वाह्य आवरण के भीतर की सिसकी को लघु कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया ।

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