रविवार, 30 अप्रैल 2017

लता मंगेशकर उस संगीत का नाम है , जो कानों से सीधे रूह में उतरता है





संजीत कुमार शुक्ला
अगर आप गायन की बात करते हैं और खास कर फ़िल्मी गायन की तो जो नाम सबसे पहले जेहन में उभर कर आता है वह है लता मंगेशकर |आज लता मंगेशकर महज एक व्यक्ति का नाम नहीं सुरों का पर्याय है | जिसमें शामिल हैं न जाने कितने आरोह – अवरोह , न सिर्फ हिंदी सिनेमा के बल्कि 20 भाषाओं में 30,000 से भी अधिक गानों के |यूँ ही हम उन्हें स्वर कोकिला की उपाधि नहीं देते | ये उनकी गायकी का ही कमाल  है की एक बार अमिताभ बच्चन ने किसी कार्यक्रम में कहा था की पकिस्तान हमसे दो ही चीजे मांगता है कश्मीर और लता मंगेशकर , और हम दोनों नहीं देंगे | भारत रत्न लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका हैं जिनका छ: दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। उनकी आवाज़ सुनकर कभी किसी की आँखों में आँसू आए, तो कभी सीमा पर खड़े जवानों को सहारा मिला। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की संगीत ही लता जी का जीवन है |उन्होंने स्वयं को पूर्णत: संगीत को समर्पित कर रखा है।

जीवन परिचय 
कुमारी लता दीनानाथ मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर, 1929 इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था।उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक कुशल रंगमंचीय गायक थे। दीनानाथ जी ने लता को तब से संगीत सिखाना शुरू किया, जब वे पाँच साल की थी। उनके साथ उनकी बहनें आशा, ऊषा और मीना भी सीखा करतीं थीं। लता ‘अमान अली ख़ान साहिब’ और बाद में ‘अमानत ख़ान’ के साथ भी पढ़ीं। लता मंगेशकर हमेशा से ही ईश्वर के द्वारा दी गई सुरीली आवाज़, जानदार अभिव्यक्ति व बात को बहुत जल्द समझ लेने वाली अविश्वसनीय क्षमता का उदाहरण रहीं हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण उनकी इस प्रतिभा को बहुत जल्द ही पहचान मिल गई थी। लेकिन पाँच वर्ष की छोटी आयु में ही आपको पहली बार एक नाटक में अभिनय करने का अवसर मिला। शुरुआत अवश्य अभिनय से हुई किंतु आपकी दिलचस्पी तो संगीत में ही थी।वर्ष 1942 में इनके पिता की मौत हो गई। इस दौरान ये केवल 13 वर्ष की थीं। नवयुग चित्रपट फिल्‍म कंपनी के मालिक और इनके पिता के दोस्‍त मास्‍टर विनायक (विनायक दामोदर कर्नाटकी) ने इनके परिवार को संभाला और लता मंगेशकर को एक सिंगर और अभिनेत्री बनाने में मदद की।
फ़िल्मी सफ़र
कहते है की सफलता यूँही आसानी से नहीं मिल जाती | लता जी को भी अपना स्थान बनाने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पडा़। कई संगीतकारों ने तो उनको शुरू-शुरू में पतली आवाज़ के कारण काम देने से साफ़ मना कर दिया था। उस समय की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका नूरजहाँ के साथ लता जी की तुलना की जाती थी। उन्हें नूरजहाँ के स्टायल में गाने के लिए कहा जाता | पहले के उनके कुछ गीत उसी तरीके से गाये हुई हैं | पर बाद में लता जी ने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर अपने ही स्वरों में गाने लगीं | शुरू में तो दिक्कत हुई | लेकिन धीरे-धीरे अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर लता जी को काम मिलने लगा। लता जी की अद्भुत कामयाबी ने लता जी को फ़िल्मी जगत की सबसे मज़बूत महिला बना दिया था। लता जी को सर्वाधिक गीत रिकार्ड करने का भी गौरव प्राप्त है। फ़िल्मी गीतों के अतिरिक्त उन्होंने ग़ैरफ़िल्मी गीत भी बहुत खूबी के साथ गाए हैं।
लता जी की सफलता की शुरुआत हुई सन् 1947 में, जब फ़िल्म “आपकी सेवा में” उन्हें एक गीत गाने का मौक़ा मिला। इस गीत के बाद तो आपको फ़िल्म जगत में एक पहचान मिल गयी और एक के बाद एक कई गीत गाने का मौक़ा मिला। इन में से कुछ प्रसिद्ध गीतों का उल्लेख करना यहाँ अप्रासंगिक न होगा। सफलता के मार्ग में 1949 में गाया गया “आएगा आने वाला”,मील का पत्थर साबित हुआ | जिस के बाद आपके प्रशंसकों की संख्या दिनोदिन बढ़ने लगी। इस बीच आपने उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया। अनिल बिस्वास, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन, नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र इत्यादि सभी संगीतकारों ने आपकी प्रतिभा का लोहा माना। लता जी ने दो आँखें बारह हाथ, दो बीघा ज़मीन, मदर इंडिया, मुग़ल ए आज़म, आदि महान फ़िल्मों में गाने गाये है। आपने “महल”, “बरसात”, “एक थी लड़की”, “बडी़ बहन” आदि फ़िल्मों में अपनी आवाज़ के जादू से इन फ़िल्मों की लोकप्रियता में चार चाँद लगाए। इस दौरान आपके कुछ प्रसिद्ध गीत थे: “ओ सजना बरखा बहार आई” (परख-1960), “आजा रे परदेसी” (मधुमती-1958), “इतना ना मुझसे तू प्यार बढा़” (छाया- 1961), “अल्ला तेरो नाम”, (हम दोनो-1961), “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, (जंगली-1961), “ये समां” (जब जब फूल खिले-1965) इत्यादि। ८० के दशक के मध्य में डिस्को के जमाने में लता ने अचानक अपना काम काफी कम कर दिया हालांकि “राम तेरी गंगा मैली” के गाने हिट हो गये थे। दशक का अंत होते होते, उनके गाये हुए “चाँदनी” और “मैंने प्यार किया” के रोमांस भरे गाने फिर से आ गये थे। तब से लता ने अपने आप को बड़े व अच्छे बैनरों के साथ ही जोड़े रखा। ये बैनर रहे आर. के. फिल्म्स (हीना), राजश्री(हम आपके हैं कौन…) और यश चोपड़ा (दिलवाले दुल्हनियाँ ले जायेंगे, दिल तो पागल है, वीर ज़ारा) आदि। ए.आर. रहमान जैसे नये संगीत निर्देशक के साथ भी, लता ने ज़ुबैदा में “सो गये हैं..” जैसे खूबसूरत गाने गाये।यही नहीं अभी हाल में उनके द्वारा गया गया वीर – जारा का गीत भी अत्यंत लोकप्रिय हुआ है |
लता के बारे में किसने क्या कहा –
*नकी आवाज़ और गायन में मशक्कत नज़र आती। वह सहज है और भीतर से निकली हुई इबादत की तरह है। उनकी आवाज़ चांद पर पहुंची हुई आवाज़ है। फ़िल्मकार श्याम बेनेगल कहते हैं, उनके जैसा कोई और हुआ ही नहीं है। एक मिस्र की उम्मे कुल्सुम थीं और एक लता हैं- गुलज़ार
*कभी-कभार ग़लती से ऐसा कलाकार पैदा हो जाता है – पंडित हरि प्रसाद चौरसिया
* हमारे पास एक चांद है, एक सूरज है, तो एक लता मंगेशकर भी है!- जावेद अख्तर
*हम शास्त्रीय संगीतकारों जिसे पूरा करने में तीन से डेढ़ घंटे लगते हैं, लता वह तीन मिनट पूरा कर देती हैं। जब तक लता है, तब तक हम सुरक्षित हैं।-शास्त्रीय गायक उस्ताद आमिर खान
*‘कमबख़्त कभी ग़लती से भी बेसुरी नहीं होती।’- बड़े गुलाम अली खान साहब
*लता की आवाज़ में हिंदुस्तान का दिल धड़कता है- नौशाद
लता जी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
1- लता मंगेशकर का जन्‍म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर हुआ। इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक भी थे इसलिए संगीत इन्‍हें विरासत में मिली। लता मंगेशकर का पहला नाम ‘हेमा’ था, मगर जन्‍म के 5 साल बाद माता-पिता ने इनका नाम ‘लता’ रख दिया था।
2- लता दीदी महज एक दिन के लिए स्कूल गई थी। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोसले को स्कूल लेकर गई तो अध्यापक ने आशा भोसले को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया।
3-लता को अपने सिने करियर में मान-सम्मान बहुत मिले हैं। वे फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके अलावा सत्यजीत रे को ही यह गौरव प्राप्त है। वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त है।
4-सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का ‘गिनीज़ बुक रिकॉर्ड’ उनके नाम पर दर्ज है।
5-अभी भी गाने की रिकॉर्डिंग के लिये जाने से पहले लता मंगेशकर कमरे के बाहर अपनी चप्पलें उतारती हैं। वे हमेशा नंगे पाँव गाना गाती हैं।
6-लता की सबसे पसंदीदा फिल्म द किंग एंड आई है। हिंदी फिल्मों में उन्हें त्रिशूल, शोले, सीता और गीता, दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे और मधुमती पसंद हैं। वर्ष 1943 में प्रदर्शित ही फिल्म किस्मत उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने यह फिल्म तकरीबन पचास बार तक देखी थी।
7-लता ने मोहम्मद रफी के साथ सैकड़ो गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब उन्होंने रफी से बातचीत करना बंद कर दी थी। लता गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि मोहममद रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की। दोनों का विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया था। हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में ‘दिल पुकारे’ गीत गाया।
8-लता जी को संगीत के अलावा खाना पकाने और फ़ोटो खींचने का बहुत शौक़ है।
9-वर्ष 1962 में लता 32 साल की थी तब उन्हें स्लो प्वॉइजन दिया गया था। लता की बेहद करीबी पदमा सचदेव ने इसका जिक्र अपनी किताब ‘Aisa Kahan Se Lauen’में किया है।हालांकि उन्हें मारने की कोशिश किसने की, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया।
आजकल,हमारी स्वर कोकिला , लता मास्टर दीनानाथ अस्पताल के कार्यों में व्यस्त हैं। वे क्रिकेट और फोटोग्राफी की शौकीन हैं। लता, जो आज भी अकेली हैं, उन्होंने अपने आप को पूरी तरह संगीत को समर्पित किया हुआ है। ये कहाँ अतिश्योक्ति नहीं होगी की वो हवा जिसमें हम साँस  लेते हैं उसमें लता जी के स्वरों की मिठास घुल कर हमारे दिल को धड्काती रहती है … लता मंगेशकर जैसी शख्सियतें विरले ही जन्म लेती हैं।लता जी को उनके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाएं |

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