बुधवार, 26 अप्रैल 2017

दीप जलता रहे








नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः 

  बहुत दुःख के साथ सूचित करन पड़ रहा है की अटूट बंधन एवं सचका हौसला मीडिया ग्रुप के प्रधान सम्पादक श्री ओमकार मणि त्रिपाठी जी का निधन दिनाक 16 फरवरी २०१७ को हो गया | ओमकार मणि त्रिपाठी जी की अत्यधिक संवेदनशील  लेखक , जूझारु पत्रकार व् प्रतिभावान संपादक रहे हैं | उन्होंने अपने २4  वर्षों के पत्रकारिता जीवन को पूरी निष्ठां व् ईमानदारी के साथ निभाया | उन्होंने देश को जगाने वाले कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी कलम चलायी | दैनिक अखबार हिंदी मिलाप , स्वतंत्र वार्ता , आज का आनंद व् बुलंद इण्डिया ( मगज़ीन ) में सब एडिटर  , न्यूज़ एडिटर , ब्यूरो चीफ व् प्रधान सम्पादक की भूमिका का बहुत कुशलता पूर्वक निर्वाहन किया |उनके ५०० से भी ज्यादा लेख देश भर की विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं | उन्होंने सेना पर फिल्माई गयी एक डोक्युमेंटरी फिल्म भी लिखी व् जैन धर्म की एक एक पुस्तक का भी संपादन किया | तत्कालीन समय में वो ज्योतिष शास्त्र का वैज्ञानिक तरीके से अध्यन  कर नया दृष्टिकोण देने की दिशा में प्रयासरत थे |  उन्होंने अपने जीवन काल में कमजोर व् गरीब तबके को न्याय दिलाने के लिए अनेकों संगठनों का निर्माण किया , व् कलम के माध्यम से अपनी बात जन - जन तक पहुँचाने का प्रयास किया | "बदलें विचार बदलें दुनिया " का नारा  दे कर के उन्होंने अटूट बंधन राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका की नींव  रखी | अल्प  समय में ही जिसने देश के देश के 16 राज्यों में  अपनी पहचान बना ली | दैनिक अखबार " सच का  का हौसला " उसी कड़ी में उनका अभिनव प्रयास है 

                                                    श्री त्रिपाठी जी कहा करते थे की दीपक कोई भी किसी भी उदेश्य से जलाए उसका उजाला पूरे पथ  को आलोकित करता है | मुख्य बात है दीप जलना और एक संघठन खड़ा करना जो उस दीप  को निरंतर आलोकित रखे | मनुष्य का जीवन नश्वर है परन्तु उसके विचार अमर हैं | अच्छे विचारों का प्रचार - प्रसार इसलिए भी आवश्यक है की लोग निराशा के अँधेरे से निकल कर अपने जीवन में सकारात्मक दिशा में आगे बढें |  भारत के गरीब तबके , अनाथ बच्चों व् महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने का स्वपन स्वप्न देखने वाले श्री ओमकार मणि त्रिपाठी जी   को हम सब से छीन ले जाने वाली मृत्यु  चाहे जितनी विकराल , वीभत्स और कठोर हो पर वो इतनी शक्तिशाली  भी नहीं की उनकी  स्मृतियों , विचारों और स्नेह को हम से छीन सके | अमूर्त रूप में वह सदा हम सब के साथ रहेंगे |"और हमें दिशा दिखाते रहेंगे |  बदलें विचार बदलें दुनिया " का दीप वो जला गए हैं | अब हमारा उत्तरदायित्व है की हम उस दीप की रक्षा करें व् व् उससे प्रकाशित होने वाले पथ पर  प्रकाश को मद्धम न होने दें |  

आमीन 
वंदना बाजपेयी 
कार्यकारी संपादक 
अटूट बंधन 
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