गुरुवार, 9 मार्च 2017

” हम कमजोर नहीं है ”






” हम कमजोर नहीं है ” यह कहना है उस महिला का जो आज तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा श्रोत बनकर उभरी है |जब आप उस पर बीते गुज़ारे कल की दास्ताँ सुनेगे तो तो आप के रोंगटे खड़े हो जायेंगे , वहीँ आज उसकी हिम्मत देख कर उसके साहस को सलाम किये बिना नहीं रह पायेंगे | वो महिला है पाकिस्तान की ” मुख्तार माई |हिम्मत का दूसरा नाम बन कर उभरी महिला जिस को 14 साल पहले गैंगरेप करके बिना कपड़ों के परेड कराई गई थी, अब पाकिस्तान फैशन वीक में रैंप पर उतरीं। पाकिस्तान के कराची शहर में आयोजित कार्यक्रम में रैंप पर उतरी मुख्तार माई पाकिस्तान की ही नहीं समस्त नारी जाती के लिए साहस और आशा का रोल मॉडल बनकर उभरी। उन्होंने कहा कि अगर मेरे एक कदम से एक महिला की मदद होती है, तो मैं मुझे बहुत खुशी होगी। मंगलवार को रैंप पर उतरी मई के चेहरे पर थोड़ी घबराहट नजर आई। मई ने लाइट ग्रीन कलर का शर्ट और सिल्वर रंग का सिल्क का पायजामा पहना हुआ था, जिसे रोजिना मुनीब से डिजाइन किया था। उन्होंने अपने सिर को सार्फ से कवर किया हुआ था। मुनीब ने बताया कि उन्होंने मई को मनाया कि वह यहां आए ताकि महिलाओं में संदेश जाए कि एक बार गलत होने का मतलब ये नहीं होता कि जिंदगी खत्म हो गई है।

मई ने कहा, ‘मैं उन महिलाओं की आवाज बनना चाहती हूं जो उन परिस्थितियों से होकर गुजरी हैं, जिनका सामना मैंने किया। मेरी बहनों के लिए मेरा संदेश है कि हम कमजोर नहीं है। हमारे पास भी दिल और दिमाग है, हम सोच सकते हैं।’ मैं अपनी बहनों से कहना चाहती हूं कि अन्याय होने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए क्योंकि एक एक दिन हमें न्याय जरूर मिलेगा।
गौरतलब है कि साल 2002 में गांव की परिषद की ओर से दी गई सजा के तौर पर मुख्तार माई से सामूहिक बलात्कार किया गया था और उन्हें बिना कपड़ों के परेड कराई गई थी। मुख्तार माई के भाई (जो उस समय सिर्फ 12 साल का था) पर विरोधी कबीले की महिला से अवैध संबंधों का आरोप लगाया गया था। एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में छह लोगों को सजा सुनाई लेकिन ऊपरी अदालत ने मार्च 2005 में इनमें से पांच को बरी कर दिया था और मुख्य अभियुक्त अब्दुल खालिक की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था। सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई मुख्तार माई महिला अधिकारों के लिए चलने वाले अभियान का प्रतीक बन गई थी।

सच का हौसला से 

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