गुरुवार, 9 मार्च 2017

देश पी. एल . वी ( पुरुस्कार लौटाओ वायरस )की चपेट में





सच का हौसला की विशेष रिपोर्ट
सर्दी का मौसम दस्तक दे चूका है पर अभी भी देश का राजनैतिक तापमान बहुत गर्म है | हमारे विशेष संवाददाता के अनुसार ये जो पुरूस्कार लौटाने का नया चलन चला है | उसने सबको अपनी चपेट में ले लिया है | रोज़ -रोज़ पुरूस्कार लौटाने की ख़बरों से देश के अलग -अलग वर्गों के लोगों पर क्या असर पड़ा है | यह देखने के लिए राष्ट्रीय दैनिक समाचार पात्र “सच का हौसला” की टीम ने देश के हर उम्र , वर्ग के लोगों से बातचीत की | नतीजे चौकाने वाले हैं | आइये आप को भी इस अभूतपूर्व सर्वे की जानकारी दे दे |
सबसे पहले सच का हौसला की टीम बच्चों के स्कूल में गयी | अधिकतर छोटे बच्चे रोते नज़र आये | बच्चों को टॉफ़ी चोकलेट से बहला कर पूंछा तो बच्चे बोले , ” आंटी ये पुरूस्कार लौटने वाले लोग अच्छे नहीं हैं | क्यों के उत्तर में बच्चे सुबकते हुए बोले ,” पहले तो हमें केवल उन्ही लोगों के नाम याद करने पड़ते थे जिन्हें पुरूस्कार मिला था अब उनके भी रटने पड़ेंगे जिन्होंने लौटाए |

जब सच का हौसला की टीम ब्यूटी कांटेस्ट के दफ्तर गयी तो पता चला , फमिना मिस इंडिया की टीम यह प्रयास कर रही हैं की सुंदरियाँ पुरूस्कार लेने के अगले दिन पुरूस्कार लौटाए | इससे प्रतियोगिता को दो बार कॉवेरेज मिलेगा | साथ ही विजेताओ के नए कॉस्टयूम व् मेक अप में दुबारा स्टेज पर आने से फैशन ओर ब्यूटी इंडस्ट्री को लाखों का फायदा होगा |
कानपुर में आई . आई .टी की कोचिंग कराने वाले देशमुख सर एक नया कोचिंग इंस्टीट्युट खोल रहे हैं ” पुरूस्कार लौटाने की तैयारी कैसे करे “इसमें आपके पुरूस्कार लौटाते समय के भाषण, उठने , बैठने बोलने के तरीके व् ज्यादा देर तक मीडिया में छाए रहने तरीके सिखाये जायेंगे | उनके अनुसार इस बिजनिस में ज्यादा फायदा है | आई . आई . टी में आने वाला बंदा तो चार साल बाद हीरो बनता है | यहाँ तो पुरुस्कार लौटाने की घोषणा करने वाला भी अगले पल शाहरुख़ खान के समकक्ष नज़र आता है |
प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर रितेश कुमार जी ऐसे कपडे डिजाइन कर रहें हैं जिसमें पुरूस्कार कच्चे धागे से टंके होंगे | सुदर बालाओं के रैंप पर चलते ही ये कपडे फटेंगे और पुरूस्कार चट -चट कर गिरेंगे | अपने नए कलेक्शन की लौन्चिंग से काफी उत्साहित रितेश जी के अनुसार उन्होंने पूरी थीम तैयार कर ली है | वार्डरोप मेलफंकशनिंग के स्थान पर पुरूस्कार मेलफंकशनिंग के नाम से उनका यह शो खासा लोकप्रिय होगा |
आम जनता में खासा उत्साह है | लोग अपने पुराने से पुराने पुरूस्कार ढूंढ रहे हैं | जिससे वो भी उसे लौटा कर बहती गंगा में हाथ धो ले | पुरूस्कार लौटाया , पुरूस्कार लौटाया के शोर के बीच में कौन पूंछता है कौन सा लौटाया | पेज ३ , ४ ,५ ,६ में शामिल होनेका इससे बढ़िया अवसर नहीं मिलेगा |
सबसे खतरनाक रहा स्वास्थ्य विभाग का सर्वे | स्वास्थ्य विभाग के अनुसार देश में एक नया वायरल इन्फेक्शन फैला है | इसके वायरस का नाम है पी . एल . वी . ( पुरूस्कार लौटाओ वायरस ) जो डेंगू से भी ज्यादा खतरनाक है | डेंगू पीड़ित व्यक्ति को तो प्लेटलेट्स चढाने पर बचाया जा सकता है पर पी एल . वी का शिकार व्यक्ति न केवल कई दिनों तक स्वयं मीडिया के सामने चिल्लाता है बल्कि उसके चिल्ल्लाने से कई और लोग चिल्लाने लगते हैं | इसमें व्यक्ति की आँखे लाल और जुबान तेज हो जाती है | यह बहुत ही संक्रामक है और तेजी से दूसरों को गिरफ्त में लेता है | यहाँ तक की जो गिरफ्त में नहीं आते उनके भी दिल और दिमाग को प्रभावित करता है |
विभिन्न टी . वी चैनलों द्वरा जगह – जगह माइक व् टी . वी कैमरे लिए पत्रकार तैनात मिल जायेंगे | जो आम लोगों को रोकते हैं और पूंछते हैं ” अगर आप को पुरूस्कार मिला होता तो आप क्या करते , लौटाते या नहीं | थोड़ी देर के कलिए ही सही पर आम आदमी को ख़ास होने का अहसास होता है | हमारे सर्वे के मुताबिक़ आजकल आम लोग सड़कों पर बहुत खास कपडे पहन कर चल रहे हैं | क्या पता कब कोई पत्रकार टकरा जाए कब टी .वी पर आ जाए |
अंत में सच का हौसला टीम चौराहे पर बस की प्रतीक्षा कर रही थी तभी वहां पर एक भिखारी भीख मांग रहा था ” जो दे उसका भी भला जो न दे उसका भी भला ” जब टीम ने उसे १० का नोट दिया तो बोला , ” पुरूस्कार , नहीं है कोई देने को |
जब सच का हौसला टीम ने पूंछा , ” श्रीमान भिखारी जी आप ऐसा क्यों कह रहे हैं | तो उसने कहा , बाबूजी मोटी बुद्धि की बात है , १० रुपये की कीमत तो १० रुपये ही रहेगी पर जिन्होंने भी ( सबने नहीं ) छोटा या बड़ा कोई भी पुरूस्कार जुगाड़ और चरण वंदना से प्राप्त किया है , और देखा देखि में खामखाँ हीरो बनने के लिए लौटा रहे हैं | वो जब देखेंगे की उनको कोई तवज्जों नहीं दी जा रही है तो चौगुने दामों में हम से खरीदेंगे | जो नहीं खरीदेंगे तो भी कोई बात नहीं हम ही ये सोच कर खुश हो लेंगे की एस जन्म में इक्षा या अनिक्षा से एक पुरूस्कार तो हमारे पास भी आ गया | तभी तो जो दे उसका भी भला , जो न दे उसका भी भला |
खैर सबकी अपनी -अपनी सोंच अपनी अपनी समझ | हमारी बस आ गयी | हमारा सर्वे पूरा हो चुका था | अगर आप भी इस सर्वे में शामिल होना चाहते हैं तो आप का स्वागत है | हमारा पता है ……. sachkahausla@gmail.com या editor.atootbandhan@gmail.com | अपने विचार भेजिए और इस सर्वे को महा सर्वे बनाइये |
व्यंग : वंदना बाजपेयी
कार्यकारी संपादक -अटूट बंधन ग्रुप

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