रविवार, 6 नवंबर 2016

माँ

         


बच्चा , सुबह विधालय के लिए निकला और पढ़ाई के बाद खेल के पीरियड में ऐसा रमा कि दोपहर के तीन बज गए |
माँ डाँटेगी! डरता – डरता घर आया | माँ चौके में बैठी थी , उसके लिए खाना लेकर | देरी पर नाराजगी बताई , पर तुरंत थाली लगाकर भोजन कराया | भूखा बच्चा जब पेट भर भोजन कर तृप्त हो गया तो , माँ ने अपने लिए भी दो रोटी और सब्जी उसी थाली में
लगा ली |
‘’ ये क्या माँ  ! तू भूखी थी अब तक ? ‘’
‘’ तो क्या  ! तेरे पहले ही खा लेती क्या  ? ‘’ तेरी राह तकती तो बैठी थी  | ‘’
अपराध बोध से ग्रस्त बच्चे ने पहली बार जाना कि माँ सबसे आखिर में ही  भोजन करती है |


  सतीश राठी

सच का हौसला




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