शनिवार, 23 अप्रैल 2016

विश्व पुस्तक दिवस पर सुविचार

१ .. विश्व एक पुस्तक है जो घूमते नहीं वह केवल पन्ने पढ़ते हैं |
२ …अभी तक किन्ही दो व्यक्तियों ने एक ही किताब नहीं पढ़ी है |
३ … जब कोई अति विद्वान व्यक्ति मिल जाए तो पूछना , ” आप ने कौन सी किताबें पढ़ी हैं |
४ …किताबों के बिना कमरा जैसे आत्मा के बिना शरीर

५ …मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय है.-जोर्ज लुईस बोर्गेज़
६ .. मुझे टेलीविज़न बहुत शिक्षित करने वाला लगता ही . हर बार जब कोई इसे चलाता है , मैं दूसरे रूम में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ.- ग्रुशो मार्क्स
७ …यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनंद ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है…. ऑस्कर वाइल्ड
८ ..कुछ किताबों को चखना चाहिए , कुछ को निगलना , लेकिन बस कुछ को ही अच्छे से चबाना और पचाना चाहिए ….कार्नेलिया फंकी
९…अपना तेज बनाये रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की ज़रुरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों की.. जोर्ज आर आर मार्टिन
१० ..बोलने से पहले सोचो. सोचने से पहले पढ़ो .-फैन लैबोवित्ज़
११ .किताबें दर्पण की तरह हैं: यदि एक मूर्ख अन्दर देखता है तो आप किसी प्रतिभावान के बाहर देखने की उम्मीद नहीं कर सकते.- जे के रोलिंग
१२ ..लेकिन मेरे लिए , अगर किताब अच्छे से लिखी गयी है , वो हमेशा मुझे बहुत छोटी लगती है…. जैन ऑस्टिन

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