सोमवार, 18 अप्रैल 2016

ईश्वर का काम काज




एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान- आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे,
एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बन कर खड़ा हो जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आओ l
भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो
भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना कुछ बोलना नहीं,
मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है, सेवक मान जाता है l
सबसे पहले मंदिर में बिजनेस मैन आता है और कहता है, भगवान मैंने एक नयी फैक्ट्री
डाली है, उसे खूब सफल करना l

वह माथा टेकता है, तो उसका पर्स नीचे गिर जाता है l वह बिना पर्स लिये ही चला जाता है l
सेवक बेचैन हो जाता है. वह सोचता है कि रोक कर उसे बताये कि पर्स गिर गया, लेकिन शर्त की
वजह से वह नहीं कह पाता l
इसके बाद एक गरीब आदमी आता है और भगवान को कहता है कि घर में खाने को कुछ नहीं. भगवान मदद करो l तभी उसकी नजर पर्स पर पड़ती है. वह भगवानका शुक्रिया अदा करता है और पर्स लेकर चला जाता है l
अब तीसरा व्यक्ति आता है, वह नाविक होता है l
वह भगवान से कहता है कि मैं 15 दिनों के लिए जहाज लेकर समुद्र की यात्रा पर जा रहा हूं,
यात्रा में कोई अड़चन न आये भगवान.. तभी पीछे से बिजनेस मैन पुलिस के साथ आता है और कहता है कि मेरे बाद ये नाविक आया है l
इसी ने मेरा पर्स चुरा लिया है,पुलिस नाविक को ले जा रही होती है तभी सेवक बोल पड़ता है l
अब पुलिस सेवक के कहने पर उस गरीब आदमी को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है. रात को भगवान आते हैं, तो सेवक खुशी खुशी पूरा
किस्सा बताता है l
भगवान कहते हैं, तुमने किसी का काम बनाया नहीं, बल्कि बिगाड़ा है l
वह व्यापारी गलत धंधे करता है, अगर उसका पर्स गिर भी गया, तो उसे फर्क नहीं पड़ता था l
इससे उसके पाप ही कम होते, क्योंकि वह पर्स गरीब इंसान को मिला था. पर्स मिलने पर उसके बच्चे भूखों नहीं मरते.
रही बात नाविक की, तो वह जिस यात्रा पर जा रहा
था, वहां तूफान आनेवाला था,
अगर वह जेल में रहता, तो जान बच जाती.
उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती. तुमने सब गड़बड़ कर दी l

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