मंगलवार, 12 अप्रैल 2016

फेसबुक एप - ये फेसबुक है ये सब जानती है


 





आपको एक पुरानी फिल्म जरूर याद होगी | नाम था शतरंज के खिलाड़ी | वो नवाबों के ज़माने की फिल्म थी | पर यहाँ मैं फिल्म की बात नहीं करना चाहता | मैं बात करना चाहता हूँ खेल शतरंज की | काफी नवाबी खेल हुआ करता था | उस समय लोग जिनके पास समय होता था वह इसे खेला करते थे | एक एक चाल सोचने में मिया चार पांच घंटे लग जाते | वजीर तो वजीर पैदल भी २ २ घंटे टस से मस नहीं होता | गोया पान खाते रहो और पीक थूकते -थूकते सुबह से शाम हो जायेगी | वो जमाना गया , फिर आया ताश का जमाना , नहले पर दहला डालते घंटे चुटकियों में कट जाते | पान खाने और पीक थूकने की आदत ने यहाँ भी खूब साथ निभाया |
हम भारतीय तो उसी में खुश थे | तभी मार्क जुकरबर्ग फेसबुक लेकर आ गए | कहा रिश्ते नातेदारों को एक सूत्र में बाँध कर रखेंगे | दूर रह कर भी पास रहेंगे | बस सब दौड़ पड़े कोई एक आई डी से, २ -४ कोई फेक आई डी से | ५ रिश्तेदारों के
नाम भी न जानने वालों ने ५००० मित्र बनाये | सब सेलेब्रेटी स्टेटस हो वाले हो गए | पर पान खाने और पीक थूकने की आदत गयी नहीं | बस फर्क इतना आया की ये सारी की सारी पीक आभासी होती जो एक दूसरों की पोस्ट पर थूंकते फिरते | बातों के फ़साने बनते | देश में कोई भी मुद्दा चल रहा हो | यहाँ फ़साना बनते देर नहीं लगती | देश में कहीं असहिष्णुता हो न हो फेसबुक पर जम कर दिखती |
शायद मार्क जुकरबर्ग इस थूकां थाकी से परेशां हो गए और बड़े बच्चों को व्यस्त करने के लिए एप पर एप बनाने शुरू कर दिए | फार्मूला काम, कर गया कुछ लोग थूका थाकी छोड़ कर एपा एपी में व्यस्त हो गए | और क्यों न हो ? ये एप आपके बारे में सब कुछ जानते हैं | शुरू -शुरू तो फेस बुक ने कम हिम्मत दिखाई | तब एप ऐसे आते थे …. आपके दोस्त आपके बारे में क्या सोचते हैं , आपके क्लोज फ्रेंड कौन हैं | बस पब्लिक इसमें जरा सा उलझी नहीं की फेसबुक के तो पर लग गए | सीधा हमारे मन के बारे मैं भविष्यवाणियाँ करने लगे | आप कितने प्रतिशत अच्छे हैं | आप के दिल का रंग कौन सा हैं | हमें पक्का याद है इतना रट के गए थे क्लास २ में की दिल का रंग चौक्लेटी लाल होता है | पर क्लास में जाते जाते वो लाल कब हरे में बदल गया पता ही नहीं चला | हां ! इतना जरूर याद है टीचर ने मार -मार कर हाथ लाल कर दिया था | खुदा गवाह है सारी दुनिया के अध्यापकों में क्रीऐतिविटी बिलकुल नहीं होती | बस जो कह दिया सो कह दिया | काश तब फेस बुक होता तो रटने की जरूरत ही नहीं पड़ती लाल , हरा नीला , पीला गुलाबी जो भी मन में आया लिख देते | पास तो होना ही था |टीचर कुछ कहती तो झट से मोबाइल पर फेस बुक खोल दिखा देते |
अभी ऐसे ही एक दिन एक एप बता रहा था | आप किसे जैसे दिखते हैं | झट दबा दिया | खुदा की कसम हम तो ख़ुशी से झूम उठे जब फेस बुक ने बताया आप धर्मेन्द्र की तरह दिखते है | क्या जमाना हुआ करता था धर्मेन्द्र का | बॉडी शोडी , डोले -शोले | हमारे तो पैर जमीन पर नहीं टिक रहे थे | लोग लाइक पर लाइक लगा रहे थे | और हम तुरंत ये खुशखबरी उसे बताने पहुँच गए जिसे हम लाइक करते हैं | उल्टा सीधा न सोचिये | हम गए हमारी एक मात्र धर्मपत्नी के पास | पहले तो हमें देख कर बुरा सा मुह बना कर बोली ,” अभी तक नहाए नहीं , ऑफिस नहीं जाना है क्या ? कह कर वो बर्तन धोने में जुट गयी | हमने तरह -तरह के मुँह बना कर दिखाने की कोशिश की की वो हमारी तरफ देखे पर उन्हें नहीं देखना था तो नहीं देखा | आखिरकार हमने खुद ही बता दिया , ” जरा ध्यान से देखो फेस बुक बता रहा है हमारी शक्ल धर्मेन्द्र से मिलती है | पत्नी के हाथ से बर्तन छूट गया | थोड़ी देर तक हमें निर्विकार भाव से देखती रहीं फिर बोली ,” हां सच्ची ! मिलती तो है | पर तब के धर्मेन्द्र से नहीं अब के धर्मेन्द्र से | खुदा गवाह है ४४० वोल्ट का झटका लगा | हम आसमान से गिरे और खजूर पर भी अटकने को नहीं मिला |
जैसे दिल का गम मिटाने के लिए शराबी शराब के पास दौड़ता है वैसे ही फेस्बुकिया फेसबुक के पास | हम भी तुरंत फेस बुक क शरण में गए | फेस बुक ने हमें एप की बदौलत टाइम मैगजीन के कवर पर छापा , अखबार के पहले पन्ने पर छापा , मोदी हमारे बारे में क्या सोचते हैं बताया | पर मन का जख्म भरा नहीं | तभी हमारी नज़र एक और एप पर पड़ी | आप पिछले जन्म में क्या थे ? अब इस जन्म में तो धर्मेन्द्र (अभी वाले ) से शक्ल मिला कर कोई इज्ज़त रही नहीं पिछला ही जान लें | बटन दबाते ही हम बल्लियों उछ ल पड़े | मतलब ये की हम अपने मरने से १० साल पहले ही पैदा हो गए थे | हम क्लास में थे जब हमारे मरने की खबर आई थी | तब पता होता तो सारे स्कूल को बताते , की अदब से बात करो हम वो महा पुरुष हैं जिनकी इस समय सब शौर्य गाथाएं गाने में लगे हैं |
खैर वो तो अतीत हो गया | पर अगर फेस बुक की माने तो हम अभी कहीं पैदा भी हो गए होंगे | और हो सकता है जवान और खूबसूरत भी दिखते हों | अगर ऐसा एप आया तब बात करेंगे पत्नी जी से | देखो अभी हम ऐसे दिखते हैं | हमें विश्वास है की ऐसा एप जरूर आएगा | क्योंकि पिछला हो या अगला ये फेसबुक है ये सब जानती है |

संजीत शुक्ल 

sanjit shukla
                                        

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