गुरुवार, 5 नवंबर 2015

आओ जलाए साहित्य दीप : मिटाए भीतरी अन्धकार ( लेख -संगीता सिंह भावना )



हम हर वर्ष दीपावली मनाते हैं | हर घर ,हर आंगन,हर गाँव ,हर बस्ती एक जगमग रौशनी से नहा उठती है | यूँ लगता है जैसे सारा संसार एक अलग ही पोशाक धारण कर लिया है | इस दिन मिट्टी के दिये में दीप जलाने की मान्यता है | क्योंकि मिट्टी के दिये में हमारी मिट्टी की खुश्बू है,मिट्टी का दिया हमारा आदर्श है,हमारे जीवन की दिशा है,संस्कारों की सीख है,संकल्प की प्रेरणा है और लक्ष्य तक पहुँचने का सबसे अच्छा माध्यम है | दीपावली अपने आप में बेहद ही रौशनी से परिपूर्ण आस्था का त्यौहार है पर इसकी सार्थकता तभी पूर्ण है जब हमारे मन के भीतर का अंधकार भी दूर हो | यह त्यौहार भले ही सांस्कृतिक त्यौहार है पर ऐतिहासिक महापुरुषों के प्रसंग से भी इस पर्व की महता जुडी है | दीपावली लौकिकता के साथ-साथ आध्यात्मिकता का भी अनूठा पर्व है | 'अंधकार से प्रकाश की ओर प्रशस्त' ही  इस पर्व का मूल मतलब है 


ज्ञान की प्रकाश ही असली प्रकाश है | हमारे भीतर अज्ञान का तमस छाया हुआ है ,वह ज्ञान के प्रकाश से ही मिट सकता हैं | ज्ञान दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाश दीप है, जब ज्ञान का दीप प्रकाशित होता है  तो भीतर और बाहर दोनों आलोकित करता है | ज्ञान के प्रकाश की हमें हर पल हर क्षण जरुरत है | जहाँ ज्ञान का सूर्य उदित हो गया वहां अंधकार टिक ही नहीं सकता | 
हलांकि दीपावली एक लौकिक पर्व है ,फिर भी यह केवल बाहरी  अंधकार को ही नहीं,बल्कि भीतरी अंधकार को भी मिटाने का पर्व बने ऐसी हमारी कोशिश होनी चाहिए | हम अपने भीतर धर्म और ज्ञान का दीप जलाकर मोह और लालच के अंधकार को दूर कर सकते हैं | हमें  अपने भीतर के सारे दुर्गुणों को मिटाकर उसमें आत्मा रूपी दीपक की अखंड ज्योति को प्रज्वलित करना होगा तभी हमारा मनुष्य जीवन सार्थक और समृद्ध होगा | अगर हम  कभी अपनी सारी इन्द्रियों को विराम देकर एकाग्र मन से अपने अन्दर झांकना शुरू कर  दें तो यक़ीनन हमें एक दिन ऐसी झलक मिल जाएगी कि हमारा अंतर्मन रोमांचित एवं प्रफुलित हो जायेगा ,इसमें कोई संदेह नहीं ......! भीतर का जगत बहुत ही विशाल है ,यहाँ प्रकाश की लौ हमेशा प्रकाशित रहती है| यहाँ हर पल एक दिव्य ज्योत जलते रहती है | बस जरुरत है इसे अपने अन्दर प्रज्वलित करने का | दीपावली पर्व की सार्थकता के लिए हमें अपने अन्दर एक लौ प्रकाशित करना होगा क्योंकि दिया चाहे मन के अन्दर जले  या मन के बाहर उसका काम तो उजाला देना ही है ,सो वह अवश्य देगा | दीपावली का सन्देश है, हम जीवन से कभी विचलीत न हों और न ही कभी पलायन की सोंचें ,उन सबसे अलग हटकर जीवन को परिवर्तन दें क्योंकि पलायन किसी भी समस्या का हल नहीं बल्कि बुजदिली की निशानी है |

Sangeeta Singh Bhavna

                                                       संगीता सिंह 'भावना'
                                               सह-संपादक --त्रैमासिक पत्रिका 
                                                   करुणावती साहित्य धारा 

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