सोमवार, 2 नवंबर 2015

आओ जलाए साहित्य दीप : एक वर्ष : अटूट बंधन के साथ


प्रिय अटूट बंधन
              आज तुम एक वर्ष के हुए और इसी के साथ हमारी मित्रता भी एक वर्ष की हुई। एक वर्ष की इस यात्रा में विभिन्न, पर नित नए कलेवर में नए-नए साहित्यिक पुष्प लिए तुम जब-जब हमारे सम्मुख आए....हमें सम्मोहित करते गए, अपने आकर्षण में बांधते गए। एक-एक कड़ी के रूप में सदस्य जुड़ते रहे कि आज अटूट बंधन परिवार के रूप में हम तुम्हें अपने संग लिए औरों के सम्मुख थोड़ा गर्व से, थोड़ा प्यार से इठलाते हुए, इतरा कर चलते हैं मानो कह रहे हों कि देखा हमारी एक वर्ष की यात्रा का यह मनोरम रूप कि अब इस यात्रा के दूसरे अध्याय को लिखने की और बढ़े जा रहे हैं।

        व्यावसायिकरण के इस युग में जब रिश्तों से विश्वास उठने सा लगा था तब हौले से एक पदचाप सुनाई दी, जिसकी छुअन ने मन-प्राणों में एक सिहरन सी जगाई और देखा कि तुम्हारे रूप में एक देवदूत रिश्तों की गठरी लिए साहित्य के आँगन में हौले-हौले उतर रहा है, जिससे कोलाहित हुए धरती-गगन ! सुवासित हुए हृदयांगन ! उस गठरी से बिखरे मोती नए अर्थ लिए रिश्तों की बगिया सिंचित करने लगे। जीवन से हारे, एकाकी, पक्षियों, तितलियों, भौरों, जुगनुओं जैसे सभी हृदयों को अपनी ओर खींचने लगे।
          और एक बात बताऊँ, शायद तुम्हें न भी मालूम हो कि हमारा साथ अभी तक फेसबुक के द्वारा हो पुष्पित-पल्लवित होकर इस मोड़ तक पहुँचा है। साकार रूप में तुम्हें देखना कितना रोमांचक होगा.....कम से कम अभी तो मेरे लिए यह कल्पना करना कठिन है।
       तुम्हें नहीं पता अटूट बंधन कि तुम किस तरह मेरे सपनों का आसमान और उनकी उड़ान बन गए हो। तुम्हारे साथ-साथ मेरी सृजनशीलता को भी पंख लग गए हैं। मैं भी नित नए विचार-रंगों से तुम्हारा श्रृंगार करके तुम्हारे ही साथ-साथ विकास की उड़ान भरने के लिए अपने बंधे पंखों को खोल कर सपनों में सच का रंग भरने की और उन्मुख हो गयी हूँ। तुमने न जाने कितने मुझ जैसों को अपने बंधन में बाँध कर, अपना बना कर उत्साह, आत्मविश्वास, सृजनशीलता, नवीनता के इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर किया है। तुम्हारे साथ उत्सवों के रंग चतुर्दिक बिखर कर अपनी द्विगुणित आभा से हमारे मनों में गहराई से उतर रहे हैं। कितना अच्छा और सुखद  लग रहा है विकास की सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए तुम्हारे साथ कदम से कदम मिला कर चलना।
       तुम इसी तरह नित नए रंग, नए विचार, नया कलेवर लिए हम सबके साथ अपने नाम को सार्थक करते हुए सबके मनों में प्रवेश करो।
  बढ़े कदम बढ़ते रहें, नए कदम जुड़ते रहें
  प्यार का ये कारवाँ, बस यूँ ही बढ़ता रहे।
       जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाओं के साथ...........।
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डॉ.भारती वर्मा बौड़ाई


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