मंगलवार, 6 अक्तूबर 2015

प्रेरक कथा : जैसी करनी वैसी भरनी








एक किसान एक बेकर  को रोज ही एक सेर मख्खन बेचा करता था। एक दिन बेकर ने यह परखने की सोची कि क्या यह मख्खन वाकई एक सेर है या फिर नहीं, उसने मख्खन तौला और पाया कि मख्खन कम था। इस बात से वह बहुत गुस्सा हुआ और उस किसान को अदालत में ले गया। जज ने किसान से पूछा कि उसने 
मख्खन को तौलने के लिए किस बाट का इस्तेमाल किया था? किसान ने कहा, “साहब, मैं पढ़ा-लिखा नही हूँ, अज्ञानी हूँ। मेरे पास तौलने के लिए कोई सही बाट नही है,
लेकिन हुजूर मेरे पास तौलने के लिए एक तराजू है।
जज ने प्रश्न किया-तुम मख्खन को कैसे तौलते होकिसान ने जवाब दिया, “इसने तो मख्खन मुझसे अभी-अभी खरीदना शुरू किया है, मैं तो पहले से इससे एक सेर ब्रेड खरीद रहा हूँ। रोज सुबह जब ब्रेड लाता है, तो मैं ब्रेड को बाट बनाकर बराबर का मख्खन तौल कर दे देता हूँ। साहब इसमें किसी का दोष है तो वह है इस बेकर का! इससे आज पता चल गया कि जिंदगी में हमें वही वापिस मिलता है, जो हम दूसरों को देते हैं...।

प्रेरक कथाओं से 


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