रविवार, 27 सितंबर 2015

बिटिया दिवस : जूही की कली मेरी लाडली




बिटिया दिवस(डॉटर्स डे ) की शुरुआत 2007 से हुई। यूनिसेफ, क्राई और आर्चीज़ ने मिलकर बिटिया दिवस की शुरुआत की। यूनिसेफ और क्राई ने पहले 24 सितंबर 2007 को बिटिया दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया था, मगर बाद में इसमें बदलाव कर सितंबर का चौथा रविवार चुना गया और पहली बार यह सितंबर के चौथे रविवार यानी 23सितंबर, 2007 को मनाया गया। आप इस दिन को अपनी बेटी के साथ सेलिब्रेट करें। डॉटर्स डे को मनाए जाने की सबसे बड़ी वजह
थी कि हर रोज 100 से भी ज्यादा लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है या जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। आज भी समाज में कई घर ऐसे हैं, जहां बेटियों को बेटे के मुकाबले अच्छा खाना और अच्छी पढ़ाई नहीं दी जा रही हैं। इन्हीं सब भेदभाव को मिटाने के लिए बिटिया दिवस मनाने पर जोर दिया गया।

         आज हम बिटिया दिवस पर लाये हैं कुछ गीत ........ 



गुड़िया, हमसे रूठी रहोगी

गुड़िया, हमसे रूठी रहोगी
कब तक, न हँसोगी
देखो जी, किरन सी लहराई
आई रे आई रे हँसी आई
गुड़िया ...

झुकी-झुकी पलकों में आ के
देखो गुपचुप आँखों से झाँके
तुम्हारी हँसी
फिर भी, अँखियाँ बन्द करोगी
गुड़िया ...

अभी-अभी आँखों से छलके
कुछ-कुछ होंठों पे झलके
तुम्हारी हँसी
फिर भी, मुख पे हाथ धरोगी
गुड़िया ...

 मजरूह सुल्तानपुरी
          

बिटिया रानी 

गुड़िया रानी बिटिया रानी 
परियों की नगरी से इक दिन
राजकुंवर जी आएंगे महलों में ले जाएंगे
गुड़िया रानी बिटिया रानी ...

आगे पीछे घोड़े हाथी बीच में होंगे सौ बाराती
कितनी आज अकेली है तू तेरे कितने होंगे साथी
मैं खुश मेरी आँख में पानी
गुड़िया रानी बिटिया रानी ...

तू मेरी छोटी सी गुड़िया बन जाएगी जादू की पुड़िया
तुझपे आ जाएगी जवानी मैं तो हो जाऊँगी बुढ़िया
भूल ना जाना प्रीत पुरानी
गुड़िया रानी बिटिया रानी ...


आनंद बख्शी 

गोरी ज़रा हँस दे तू, हँस दे तू
हँस दे ज़रा
ओ छोरी ज़रा हँस दे तू, हँस दे तू
हँस दे ज़रा

ओ जिद्दी छोकरी, फूलों की टोकरी
अरी जादू भरी पुड़िया
ओ छोटी सी पिटीया, गज़ भर की चुटिया
ना कर गुस्सा मेरी गुड़िया
गोरी ज़रा हँस...

जीवन के रास्ते, हँसने के वास्ते
ना रोना तू मेरी नीता
तुझको घुमाऊंगा, दुनिया दिखाऊंगा
ना कर झगड़ा मेरी रीटा
गोरी ज़रा हँस...

मेरी कठपुतली, बिजली से उजली
बड़ी भोली तेरी दुनिया
चलने में तीर है, कितनी शरीर है
बड़ी जिद्दी मेरी मुनिया
गोरी ज़रा हँस...

हसरत जयपुरी 




जूही की कली मेरी लाडली


जूही की कली मेरी लाडली
नाज़ों की पली मेरी लाडली
ओ आस-किरन जुग-जुग तू जिये, नन्ही-सी परी मेरी लाडली
ओ मेरी लाडली
धरती पे उतर आया चँदा, तेरा चेहरा बना
चंपे का सलोना गुलदस्ता तन तेरा बना
कोमल तितली मेरी लाडली, हीरे की कनी मेरी लाडली
ओ आस-किरन जुग-जुग तू जिये, नन्ही-सी परी मेरी लाडली
ओ मेरी लाडली
शर्माए दीवाली तारों की तेरे नैनों से
कोयल ने चुराई है पंचम तेरे बैनों से
गुड़िया-सी ढली मेरी लाड़ली, मोहे लागे भली मेरी लाडली
ओ आस-किरन जुग-जुग तू जिये, नन्ही-सी परी मेरी लाडली
ओ मेरी लाडली
हर बोल तेरा सिखलाए हमें दुख से लड़ना
मुस्कान तेरी कहती है सदा धीरज धरना
गंगा की लहर मेरी लाड़ली, चंचल सागर मेरी लाडली

ओ आस-किरन जुग-जुग तू जिये, नन्ही-सी परी मेरी लाडली
ओ मेरी लाडली
जुही की कली …
शैलेन्द्र





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