रविवार, 13 सितंबर 2015

ज्योत से ज्योत जलाते चलो :पढने में लगा मन : नीलम






पढने में लगा मन 
                    बात तब की है जब मैं बहुत छोटी थी | अपने पापा -मम्मी की एकलौती बेटी होने के कारण शैतान और नकचिढ़ी  भी थी | जिद्दी इतनी की जो मांगू जब तक मिल न जाए तो खैर नहीं | पढ़ाई से तो मेरा दूर -दूर तक नाता ही नहीं था | हर बार पी टी ऍम में माँ -पापा को मेरी ढेरों शिकायतें सुनने को मिलती | घर में आ कर माँ मुझे पढने के लिए कहती , डांटती  ,मारती पर मेरे कान पर जूँ भी नहीं रेंगती | बात शायद फोर्थ क्लास की है जब मेरी रोज -रोज होम वर्क न करने की आदत से परेशांन  हो कर  मेरी टीचर ने माँ को समझाया की इसी किसी ईनाम का लालच दीजिये जिससे ये पढ़े व् अच्छे नंबर लाये | मेरे पापा बड़े व्यवसायी हैं ,घर में कोई कमी कभी देखी  नहीं |फिर भी माँ ने टीचर की बात पर अमल करते हुए     मेरा मनपसंद कैमरा देने की पेशकश की | उन्होंने कहा " अगर मैं इस बार अच्छे नंबर लायी तो वो मुझे गिफ्ट में कैमरा देंगी
| पर  मेरे दिमाग में कैमरा घूम गया ,मैं इतना सब्र कहाँ कर सकती थी|  मैं उसी रात पापा से उस कैमरे की जिद कर बैठी , मैंने खाना भी नहीं खाया |पापा की लाडली होने के कारण एक दो दिन में  कैमरा मेरे हाथ में था | फिर किसको पढना था | बस दिन भर क्लिक ,क्लिक ,क्लिक | नतीजा मेरी कक्षा में सबसे पिछली रैंक आई | बस यूँ कहिये की फेल होने से बच गयी | माँ -पापा चाहते थे की मैं अच्छी पढाई  करू ....पर  मैं तो मैं ही रही| अगले साल क्लास ५ में स्कूल की तरफ से बंगलौर टूर गया | जाहिर हैं मैं भी गयी | हमने बहुत मजा किया | एक दिन यूँ ही घुमते -घुमते हम इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ़ साइंस के बाहर से निकले | मेरी टीचर ने " नीलम देखो , इसके अन्दर हर कोई नहीं घुस सकता , केवल अपनी योग्यता को सिद्ध करके ही यहाँ प्रवेश मिल सकता है | पैसे के दम पर तुम दुनिया में चाहे जहाँ घूम लो पर यहाँ तुम्हारे पापा का पैसा काम नहीं आएगा | मैं एक टक  देखती रही | उस दिन से मैंने प्रण किया कि मुझे बहुत पढना है आई .आई .एस में  जाना है | मेरी शैतानियाँ थम गयी | टीचर ,माँ -पापा सब हैरान की मुश्किल  से पास होने वाली नीलम ९९ % नंबर कैसे ले आई | तब से आज तक मैं लगातार फर्स्ट आ रही हूँ | न  जाने कितने इंटर स्कूल क्विज कॉम्पटीशन जीत चुकी हूँ | एक छोटे से वाक्य ने मेरे जीवन की दिशा बदल दी | अब मैं शैतान नहीं पढ़ाकू हूँ ,पर जिद्दी अभी भी हूँ और देखिएगा एक दिन मैं आई .आई .एस जा कर रहूंगी .......... अपने पापा के पैसे के दम  पर नहीं ,अपनी प्रतिभा के दम  पर |

नीलम गुप्ता
दिल्ली

अटूट बंधन

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