सोमवार, 24 अगस्त 2015

एक पाती भाई /बहन के नाम ( विभा रानी श्रीवास्तव )








पूजनीय भैया
                   सादर प्रणाम
यहाँ सब कुशल है । आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है आप लोग भी सकुशल होंगे ।
                                 दोनों भाभी व बाबू से बात हुई तो मैं अति उत्साह में बोली कि इस बार मैं किसी को राखी नहीं भेजूंगी ।। शनिवार दिन है ; बैंक आधे दिन का होता है तो राखी के कारण वो आधा दिन भी छुट्टी में , छोटे भैया की छुट्टी । आप इसी साल रिटायर्ड किये हैं तो छुट्टी ही छुट्टी । बाबू टूर ले लेगा ; दूसरे दिन रविवार तो किसी को कोई समस्या नहीं , आसानी से आना हो सकता है ।
                                जब से होश सम्भाली हूँ ; राखी और जन्मदिन हर्षोल्लास से मनाती आई हूँ लेकिन दोनों एक दिन कभी नहीं मनाई , पड़ा ही नहीं न किसी साल एक दिन ही । इस साल एक दिन पड़ने से अति उत्साहित हूँ ; एकदम छोटी सी बेबी फिर जीने लगी है , उम्र का क्या वो तो भूलने में लगी है ।
                                                    जैसे जैसे दिन नजदीक आने लगे सोच बचपने पर हावी होने लगे ; अगले पल का ठिकाना नहीं ; सावन का मौसम तबीयत किसी की खराब हो सकती है । ये तो जबरदस्ती हो गई न विवश करना ; वो भी इमोशनल ब्लैकमेलिंग । ब्याही बहना का एक हद होता है , भाभी का कुछ प्रोग्राम हो सकता है । किसी कारणवश कोई भाई ना आ पाये और मैं राखी भी न भेजूं तो तब अफसोस का क्या फायदा होगा ।
                                       राखी भेज रही हूँ लेकिन नाउम्मीद नहीं हूँ । प्रतीक्षा तो नैनों को रहती है , आस में दिल होता है । कमबख्त दिमाग बहुत सोचता है ।
             
                   व्यग्र बहना
                ले अक्षत व डोरी
                   ताके ड्योढ़ी
सबको यथायोग्य प्रणामाशीष बोल देंगे मेरी ओर से
                                आशीष की आकांक्षी
                        आपकी छोटी बहना
                               बेबी

अटूट बंधन

7 टिप्‍पणियां:

  1. आभारी हूँ
    ऋणी आपके मान देने की

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  2. बहुत बढ़िया रचना
    प्रतीक्षा पूरी हो ...:)

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  3. सुंदर भावाभिव्यक्ति. दिल से निकली, दिल तक पहुँची.

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  4. ये सुखद संजोग बार बार आये | हजारों शुभ कामनाएं ...

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