रविवार, 30 अगस्त 2015

रक्षा बंधन स्पेशल - फॉरवर्ड लोग

 


आज सजल बहुत खुश था। पूरे आठ साल बाद आज रक्षाबंधन के दिन मीनल दीदी उसकी कलाई पर राखी बांधेगी। वो जब दसवीं कक्षा में था, मीनल दीदी ने कॉलेज की पढ़ाई के साथ पार्टटाइम जॉब शुरू कर दी थी। पापा -मम्मी ने रोक था कि जॉब के साथ वह पढ़ाई उतनी तन्मयता से नहीं कर पायेगी। पर मीनल को शुरू से ही ढेर सारे कपड़े, घड़ियाँ व महंगे मोबाइल्स का शौक था। उसने जल्दी ही इन्स्टालमेन्ट पर स्कूटी भी ले ली थी। पढाई पूरी होने पर जब उसके लिए विवाह प्रस्ताव आने लगे तो उसने घोषणा कर दी कि वह अपने बॉस से शादी करेगी। उसी दिन घर के दरवाजे उसके लिए बंद हो गए। इसी साल जॉब लगने की ख़ुशी में सजल ने पापा -मम्मी को मनाया था कि उसकी पहली कमाई में दीदी का भी हक़ है अतः वह राखी बंधवाने दीदी के घर जायेगा।


मीनल का बड़ा  घर देखकर सजल बहुत खुश हुआ। मीनल ने उसे अपना पूरा वैभव दिखाया। बीते आठ साल की बातें की। पापा -मम्मी को याद कर उसकी आँखे नम हो गई। उसने प्यार से सजल की कलाई पर चंडी की बेशकीमती राखी बांधी। सजल को पांच सौ का नोट थाली में रखते कुछ सकुचाहट हुई। तभी उसके जीजाजी आ गए। सबने ख़ुशी -ख़ुशी साथ खाना खाया। बातों -बातों में जीजाजी ने बताया कि
कितनी मेहनत से उन्होंने ये समृद्धि प्राप्त की है। सजल बहुत प्रभावित
हुआ। रात्रि होने पर सजल ने विदा मांगी तो जीजाजी बोले "ऐसा कैसे हो सकता है साले साहब। पहली बार घर आये हो ,हमें पूरा स्वागत तो करने दो। " उनके इशारे पर मीनल पैग बनाने लगी। सजल ने कभी शराब चखी भी न थी। मीनल को पीते देखकर उसका मुँह आश्चर्य से खुला रह गया। मीनल जान गई कि यह अभी मध्यमवर्गीय मानसिकता से बाहर नही आया है।
          वह बोली "सजल , हाई सोसाइटी में उठते बैठते हैं तो साथ देने के लिए पीना पड़ता है। अब पैसा होगा तो आदतें भी वैसी ही होगी नहीं तो लोग हमें बैकवर्ड समझने लगेंगे। तुम भी धीरे -धीरे सीख जाओगे भाई। " सजल ने निःशब्द ही वहाँ से विदा ली। घर की डोरबेल बजाई। उसे कलाई पर बंधी राखी से शराब की गंध आ रही थी पर चाहकर भी फेंक नही पाया। माँ के दरवाजा खोलने से पहले उसने राखी उतार कर जेब में रख ली।

रचना व्यास 

अटूट बंधन

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