शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

एक पाती भाई/बहन के नाम ( कल्पना मिश्रा बाजपेयी )






प्रिय भाई !!
सदैव खुश रहो !!
कुशल से रहते हुए तुम्हारी कुशलता के लिए निरंतर प्रार्थनारत रहती हूँ ,ईश्वर तुम्हें लंबी आयु प्रदान करे तुम हमेशा की तरह मुस्कराते रहो। लंबे अंतराल के बाद आज अटूट-बंधन ने मुझे चिट्ठी लिखने के लिए फिर से मजबूर कर दिया पुराने दिन याद आ गए,जब डाकिये का इंतजार घर के सदस्य के जितना होता था उसकी साइकल अपने फाटक कि तरफ मुड़ी नहीं कि भाग कर माँ को सबसे पहले संदेश मैं ही देती थी और माँ भी अपना सारा काम छोड़ फाटक तक दौड़ी चली आती थी ।तेरी चिट्ठी कि खुशी में मुझे एक बिलकुल फ्री वाली हग्गी मिल जाती थी ।  
ये रिश्ते कैसे होते है भाई ?जब पास होते है तो उनकी अहमियत पता नहीं चलती दूर होते ही, अपनी चंगुल से छूटने नहीं देते। जमाने हो गए तुम्हारे पत्र को पढे हुए ,तुम्हें याद है ना भाई जब तुम हॉस्टल से पत्र लिखते थे तो पूरे एक हफ्ते तक तुम्हारा पत्र कभी माँ द्वारा कभी मेरे द्वारा पढ़ा जाता था । एक एक शब्द में तुम बोलते से दिखाई पड़ते थे, भला हो इन मोबाइल के चलन को मिठास ही खत्म कर दी रिश्तों की खैर ....................
 अच्छा चलो, बताओ हम सब का राज दुलारा अपने राज दुलारों के साथ कैसा है ?देख भाई सावन आ गया,संग ले आया है वही पुराने सावन की मीठी याद जब मैंने माँ की कढ़ाई वाली रेशमी धागों की कई नलकियों को गुच्छे में तब्दील कर दिया था ,राखी बनाने के चक्कर में तब माँ ने गुस्से होने के बजाय एक गीत गुनगुनाया.... तार न टूटे भाई बहन के प्यार का ................ हम दोनों को गले लगा कर माँ ने एक साथ हमारे माथे सूंघे थे ।
देख पढ़ते-पढ़ते रोना नहीं तेरी गीली आँखें बरदास्त नहीं होती है मुझसे, अच्छा बता ना मेरी राखी तुझे मिली या नहीं अगर राखी पहुँचने में देर हो जाए तो तू वही पुरानी राखी फिर से बांध लेना, वैसे भी उस राखी जितना खारापन अब कहाँ ......... J मैं यहाँ कान्हा जी के हाथ में राखी बांध दूँगी तेरे नाम की क्योंकि तू भी कृष्ण से कम नहीं है मेरे लिए .... .......मेरे प्यारे भाई !!! और हाँ मिठाई तू अपनी पसंद की खा लेना वो भी अपने पैसे से  हा हा हा चल अब तो हंस दे बहुत हो लिया भावुक हंसो हंसो हाँ ये हुई न बात शेरों वाली खुश रह J
पत्र के अंत में पुनः भाभी बच्चों और तुमको ढेरों शुभाशीष चिरंजीव रहो तुम सब इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी लेखनी को विराम दे रही हूँ ।

तुम्हारी दीदी 


            atoot bandhan

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