शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

भविष्य की योजना














बहुत पहले की बात है एक गरीब आदमी था जिसका नाम था दीनदयाल | वह  हर रोज बाजार में शक्कर बेचा करता था, वह थोक में 800 रूपये के भाव से एक बोरी शक्कर खरीदता था और इस प्रकार शक्कर थोक के भाव में आठ रूपये प्रति किलो पड़ती थी. बहुत ही अच्छी बात यह थी कि वह फूटपाथ पर ही आठ रूपये किलो में शक्कर बेच देता था|  सारा शहर उसी से शक्कर खरीदने की कोशिश करता था क्योंकि थोक के भाव में ही उन्हें फूटकर शक्कर और कहीं नहीं मिलती थी. दिन भर में वह शक्कर के दस बोरे बेच लेता था|  क्योंकि ग्राहक उसके दूकान को घेरे खड़े रहते थे.. लोगों ने जब उससे पुछा कि जब वह आठ रूपये किलो में खरीदता है और उसे आठ रूपये किलो पर ही बेच देता है तो उसके हाथ और क्या बचता है? उसने बड़ा ही सटीक जवाब दिया, “बोरा...” दीनदयाल का  लक्ष्य बहुत ही स्पष्ट था  वह बोरे को प्राप्त करने के लिए बोरा भर शक्कर बेचा करता था और जब वह रात को घर लौटता था तो उसके पास दास बोरे  होते थे जिन्हें अगले ही दिन वह बाजार में दस रूपये प्रति बोरी के हिसाब से बेच देता था और इसी तरह से वह सौ रूपये कमा लेता था | इस तरह उसे नुक्सान भी न होता और बाज़ार में उसकी साख भी बन गयी | धीरे धीरे जब उसने पैसे जोड़ कर अपनी दूकान खोली तो उसकी एक ईमानदार व्यापारी की छवि बन चुकी थी | जिसकी वजह से लोग उसकी दूकान पर पहले की तरह टूट पड़ते और वह शीघ्र ही धनवान बन गया |  


शिक्षा 

जिंदगी में हमें भी दीनदयाल की तरह अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने चाहिए | हो सकता है जो काम हम कर रहे हैं उस का तात्कालिक फायदा न हो पर जो लोग भविष्य की यो
जना बना कर चलते हैं 
उन्हें अंततः लाभ ही होता है | 

संकलन कर्ता 
कविता  गुप्ता 

दिल्ली 

चित्र गूगल से साभार  

अटूट बंधन

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