गुरुवार, 23 जुलाई 2015

रिया स्पीक्स : सेल्फी विद डॉटर




!!!!!!!!!!!!!!!!!!!रिया स्पीक्स !!!!!!!!!!!!!!!!!!!


               सेल्फी विद डॉटर

दादी;( कमरे में प्रवेश करते हुए )हे शिव, शिव ,शिव आज तो ई बरखा रानी  रुकने का नाम ही नाही ले रही हैं | हे ! इंद्र देव  कित्ता बरसियो अभी ? ( बालकनी की तरफ देखते हुए ) अरे ! ईमा तो पानी भरन  लाग | रिया अरी ओ रिया तनिक बाल्टी लाओ थोडा उलीचे  |
रिया : ( दूसरे कमरे से आवाज़ लगाते हुए ) आई दादी
दादी : ( खुद से बोलते हुए )हे शिव ,शिव ,शिव ......... का भगवान् का आज का आपन नल बंद करन भूल  गए | बरसा ही जा रहा है ,बरसा ही जा रहा है ,रुकन का नाम ही नाही लेत  है | आप तो कैलाश में बैठ हो इहाँ तो  हमार छज्जा भरन  लाग | ई बड़े –बड़े शहरन में बालकनी के नाम पर छोटा सा छज्जा  ही तो दे देत हैं ऊमा भी नाली नाही बनावत  हैं , ये भी नाही सोचत हैं बरसात का पानी कैसे निकालिए | और  उहाँ गाँवो में तो बड़े बड़े चबूतरे रहे पर का उजाड़ पड़े हैं | लड़का को तो पेट की खातिर शहर में रहे के परी | ( गाँव की याद करते हुए दादी थोडा दुखी हो जाती हैं )|
रिया : (कमरे में प्रवेश करते हुए) हां ! दादी बताइये क्या बात है |
दादी : बिटिया ई जरा बाल्टी से पानी उलीचो ,छज्जा भरन लाग है | (रिया की तरफ देखते हुए ) अरी ई सुबह –सुबह तैयार काहे को हो | ( दरवाजे की तरफ देखते हुए ) अरे ई बहु भी तैयार है | कहाँ जाय रही हो ऐसी बरखा –पानी में ?
रिया : दादी हम कही जा नहीं रहे हैं ,अभी माँ मेरे साथ अपनी फोटो खींचेगी और उसे आन  लाइन  सोशल साइट्स पर शेयर करेंगी | ये एक अभियान का हिस्सा है जिसका नाम है “सेल्फी विद डॉटर “
यानी  गर्व के साथ  अपनी बेटी के साथ अपनी फोटो शेयर करो |
दादी : ई से क्या फायदा होगा बिटिया ?
रिया : दादी बात तुरंत होने वाले फायदे की नहीं है | बस इस बात पर गर्व करने की है “कि मैं एक बेटी की माँ हूँ | बेटी को जन्म देकर कोई अपराध नहीं किया है | जैसा की समाज समझाता रहता है ......कहता रहता है “ बेचारी “
दादी : पर बिटिया ई सब से क्या हुईए , लड़का तो लड़का ही होत है ,वंश चलावत है | बिटिया पराया धन |
रिया : दादी समाज की इसी सोच की वजह से ही न जाने कितनी कन्याये गर्भ में मार दी जाती हैं | बेटियों को जन्म लेने का अधिकार भी नहीं दिया जाता है | लड़की को जन्म देना  कोई दोष नहीं है |आपके समय में भी तो दादी लड़कियों के जन्म लेने के बाद दुध् मुँही  बच्ची को आटा  घोर कर पिला देते थे ,और बच्ची मर जाती थी | कोई  माँ क्रूर हो कर अपनी ही बेटी की हत्या इसलिए करती है क्योंकि उस पर समाज का दवाब है | बेटी को जन्म देने वाली माँ को नीची दृष्टि से देखा जाता है |
दादी : हाँ हमरे जमाने में ऊ तो होत रहे | पर ........
रिया : आप ही देखो दादी आपकी जरा सी परेशानी पर बुआ कैसे दौड़ी चली आती हैं ,आपकी सेवा करती हैं तब कहाँ पराई रह जाती हैं | और मैं मैं भी तो लड़की हूँ दादी ,कल को नौकरी करुँगी ,अपने ,अपने माता –पिता का सहारा बनूँगी | आज  आई .ए .एस की परीक्षा को एक लड़की ने टॉप किया है | समान अवसर मिलने पर लडकियाँ ,लड़कों से कम नहीं हैं | फिर भी  लड़कियों को जन्म लेने से रोका जा रहा है |
दादी : पर ई तमाशा से हुईए का ? का समाज सुधर जहिये ?
रिया : दादी लिंग परिक्षण कर गर्भपात करना क़ानूनन अपराध है | फिर भी हो रहा है ,क्योंकि बुराई समाज  में गहरे  पैठी है |  अभी कल की ही बात बताऊ एक महिला अपनी तीन –तीन बेटियों के साथ मेट्रों में जा रही थी | मेरे बगल में खड़ी औरत उसे देख कर बुदबुदाई “ उफ़ तीन –तीन बेटियाँ ,बेचारी !
उसे  महिला को उससे कोई मतलब नहीं  था जिसने लिंग परिक्षण न करा कर तीसरी बेटी को जन्म देने का साहस किया था | पर वो समाज की नज़र में बेचारी है और ताउम्र रहेगी | दादी समाज में गहरे पैठ बना चुकी मान्यताएं एकाएक नहीं बदलती | कानून अपना काम करता है पर इस तरह के सुधार आन्दोलनों की भी जरूरत है | धीरे –धीरे ही सही पर समाज बदलेगा | इसी अभियान की एक शुरुआत है “सेल्फी विद डॉटर “ गर्व करो कि आप एक बेटी की माँ हैं |
दादी : बिटिया तुम्हारा मोबाइल कहाँ है ?
रिया : ये रहा दादी ,पर क्यों /
दादी ( मुस्कुराते हुए ) तनिक बुआ को फोन लगा कर बुला लो | हमहूँ खीचईये “ सेल्फी विद डॉटर ‘
रिया : ( दादी के गले लगते हुए ) मेरी अच्छी दादी मेरी प्यारी दादी , आई लव यू दादी |

vandana bajpai 

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