रविवार, 3 मई 2015

सद्वचन


                                      



जो चाहा वो मिल जाना सफलता है . जो मिला उसको चाहना प्रसन्नता है 

.सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और .-

याद रखे मनुष्य का स्वाभाव एक समान होता है ........जो आपके सामने दूसरों की कमियाँ गिनाता है वह जरूर दूसरों के सामने आपने आपी कमियाँ बताता होगा

वक्त भी सिखाता है और शिक्षक भी 
फर्क बस इतना है
शिक्षक सिखा कर इम्तिहान लेता है 
और वक्त इम्तिहान ले कर सिखाता है



लक्ष्य बनाना अदृश्य को दृश्य में बदलने का पहला कदम है ।


-मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं: मौका, प्रकृति, मजबूरी , आदत, कारण, जुनून, इच्छा-


मनुष्य नश्वर है। उसी तरह विचार भी नश्वर है। प्रत्येक विचार को प्रचार -प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि किसी पौधे को पानी की।-


अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है 

इच्छा सफलता का शुरूआती बिन्दु हैं, यह हमेशा याद दखें, जिस तरह छोटी आग से कम गर्माहट मिलती हैं उसी तरह कमजोर इच्छा से कमजोर परिणाम मिलते है।


वही आप का सच्चा मित्र है जो आप की खामोशी को भी सुन लेता है

(chitr googal se saabhaar )

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