शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

सद्विचार









सद्विचार 

 1)नकारात्मक विचारों का हमारे मन पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है जैसे किसी पौधे को तेज़ाब से सींचा जाए
2 )पश्चाताप की अग्नि क्रोध की अग्नि से कंही ज्यादा भीषण होती है
3)सबसे कम खर्चीला मनोरंजन होता है श्रेष्‍ठ पुस्‍तकों के अध्‍ययन से और यह स्‍थाई होता है ।
                                                                                                                           - जार्ज बनार्ड शॉ
4 )
ऊषाकाल की पहली किरण से पहले का अँधेरा सबसे ज़्यादा घना हुआ करता है
5 )अगर आपको किसी की हॅंसी निर्मल लगती हैं तो जान लीजिये वह आदमी भी निश्छल है।
6 )आपके पास किसी की निन्दा करने वाला, किसी के पास आपकी निन्दा करने वाला होगा।
7 )अच्छा होता है हार जाना ,जब लड़ाई अपनों से हो 
लेकिन 
जरूरी होता है जीतना ,जब लड़ाई अपने आप से और अपनी कमजोरियो से हो
8 )एक क्रोधित व्यक्ति जब अपना मुंह खोलता है तो उसकी आँखें बंद हो जाती हैं है.
9 )हम केवल उन्ही शब्दों के लिए जिम्मेदार हैं जो हमने कहे हैं .... उनके लिए नहीं जो दूसरों ने समझे हैं
10 )पक्के हुए फल की तीन पहचान होती है। एक तो वह नर्म हो जाता है दूसरे वह मीठा हो जाता है तीसरे उसका रंग बदल जाता है।इसी तरह से परिपक्व व्यक्ति की भी तीन पहचान होती है पहली उसमें नम्रता होती है दूसरे उसकी वाणी मे मिठास होता है और तीसरे उसके चेहरे पर आत्मविश्वास का रंग होता है।
11 )कभी -कभी हमारा दिल उन बातों को स्वीकार करने में बहुत समय लगा देता है जिन्हें हमारा दिमाग बहुत पहले से जान गया होता है
12 )एक जहाज़ बंदरगाह पर सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है ...... पर ये वो जगह नहीं है जिसके लिए जहाज़ बना है
13 )अगर दूसरों को दु:खी देखकर .... तुम्हें भी दुःख होता है .... तो समझ लो .... कि भगवान ने तुम्हें इंसान बनाकर .... कोई गलती नहीं की है
14 )आदमी के शब्द नहीं वक्त बोलता है
15 )यदि तुम किसी चीज को पसंद नहीं करते तो उसे बदल डालो और यदि ऐसा नहीं कर सकते तो अपना नजरिया बदलो पर कभी शिकायत मत करो 
                                        माया एंजेलो

चित्र गूगल से 

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