शनिवार, 14 मार्च 2015

ये दोस्ती न टूटे कभी -




ये दोस्ती न टूटे कभी ;-
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एक पुरानी कहावत है 
"पानी पीजे छान कर ,दोस्ती कीजे जान कर "
दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है जिस तरह खराब पानी हमारे शरीर को खराब कर देता है उसी तरह गलत दोस्त हमारे जीवन को .... फिर भी हम बाज नहीं आते ,युहीं सड़क चलते -फिरते ,रेलवे प्लेटफोर्म पर ,बस स्टॉप पर ,बिना जाने समझे दोस्त बनाते चलते हैं ,या हर मिलने जुलने वाले को दोस्त कहना शुरू कर देते हैं ,धोखा खाते हैं फिर बाद में पछताते हैं ...फिर पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गयी खेत "
क्या है यह दोस्ती :-
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दोस्ती एक गहरा संवेदनात्मक अहसास ,एक खूबसूरत रिश्ता , एक ऐसा शख्स जिससे आप अपने हर राज शेयर कर सके ,जहाँ सोच -सोच कर बोलने की जरूरत महसूस न हो ....कहते हैं कि वो लोग बड़े खुशनसीब होते हैं जिन्हें सच्चे दोस्त मिलते हैं |कुछ लोग कहते हैं दोस्ती शब्द की परिभाषा जापानी भाषा के शब्द kenjoku से मिलती है ...
हमारे जीवन में ऐसे बहुत से लोग हो सकते हैं जो जापानी परिभाषा को सार्थक कर सकते हैं .....वो हमारे परिवार के सदस्य ,माँ ,भाई ,बहन ,रिश्तेदार कोई भी हो सकते हैं यहाँ तक की नर्सरी में साथ पढ़ा हुआ कोई ऐसा सहपाठी हो सकता है जो अब हमसे मीलों दूर रहता है पर यह दूर हमारे बांड को कत ई कम नहीं कर पाती है
अब प्रश्न यह उठता है कि हम केवल कुछ लोगों के प्रति ही ऐसी संवेदनात्मक अनुभूति क्यों महसूस करते हैं जबकि संसार में बहुत से लोग हैं .... वैसे तो ये सवाल बहुत पेंचीदा है और इसके संभावित उत्तर और भी भ्रमित करने वाले हैं पर फिर भी कुछ उत्तर इस प्रकार हो सकते हैं ...........
क )वो क्या है जो हमें मित्रता के बंधन में बंधता हैं
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१ )समान रुचियाँ :-
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दो लोग जिनकी रुचियाँ सामान होती हैं वो एक साथ घंटों समय बिता सकते हैं दोनों को अपनी रूचि से सम्बंधित बातें सुनना या बोलना पसंद आता है .... जैसे एक लेखक का लेखक मित्र हो तो वो ज्यादा देर तक विभिन्न पुक्तकों की चर्चा लेखन की बारीकियों आदि की चर्चा में अपना समय बिता सकते हैं ,साथ -साथ पुस्तके खरीदने जा सकते हैं(बस इर्ष्या न पनपे ) .... अगर रुचियाँ समान नहीं हो तो समय बिताना मुश्किल हो जाता है .कभी -कभी तो अगला दूसरे के अपने कम /रूचि के प्रति पैशन को समझ ही नहीं पता ....और दोती टूटते देर नहीं लगती
२ )इतिहास :-
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अगर दो लोगों के इतिहास सामान हैं तो उनमें मित्रता होने की संभावना रहती है ... अक्सर जिन लोगों ने अतीत में एक ही प्रकार के दुखों या जीवन परिस्तिथियों का सामना किया होता है वह दुसरे के दर्द को भली भाँती समझ कर जुड़ाव महसूस करते हैं परंतू अगर वर्तमान परिस्तिथिया ज्यादा भिन्न हैं तो यह जुड़ाव ज्यादा दिन तक नहीं रह पाता
३ )सामान विचारधारा :-
***************************वैसे नियम नहीं है पर अक्सर सामान विचारधारा के लोगों में ज्यादा बनती है ...मान लीजिये एक भावुक हैं एक व्यवहारिक तो कहीं न कहीं मुद्दों पर टकराव होता ही है .इसमें एक को दबाया हुआ और दूसरा दबाने वाले में तब्दील होजाता है
४ )सम व्यवहार ;-
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***मित्रता में परस्पर सामान व्यवहार बहुत जरूरी है ऐसा न हो की एक स्वामी और दूसरा सेवक बन जाए ,या फिर एक अपने हितों की तो रक्षा करे पर दूसरों के हितों को नज़रंदाज़ करे ......... अगर केवल एक की ही स्वार्थ पूर्ति होती है तो मित्रता ज्यादा दिन तक चल नहीं पाती है
ख )वो क्या है जो मित्रता को महान बना देता है :-
***********************************************मित्रता जितना खूबसूरत शब्द है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत अहसास फिर भी विरले ही लोग हैं जिन्हें सच्चे मित्र मिल पाते हैं .... प्रश्न उठता हैं वो कौन से गुण है जिसकी वजह से हम किसी को सच्चा मित्र कह पाते हैं
१ )जो खुशियों को बढ़ाये :-
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**सच्चा मित्र वो है जो आप की खुशियों को बढ़ाये ..जब कभी आप को दुखी उदास देखे तो उस कारण को दूर करने का प्रयास करे,अपना वक्त व् ऊर्जा ख़ुशी -ख़ुशी दे . अगर संभव न हो तो मन बदलने का प्रयास करे वो कभी भी जानबूझकर ऐसी कोई बात न कहे जिससे आप का दिल दुखता हो
)स्वस्थ आलोचना से न कतराये :-
***************************************भीतर हाथ सहार दे बाहर बाहे चोट , सच्चा मित्र वही है जो स्वस्थ आलोचना कर के सही राह दिखाता है ....दोस्त परिक्षा में फ़ैल न हो जाए ,अपनी किसी बिमारी की उपेक्षा तो नही कर रहा ,घर में बेवजह तो नहीं झगड़ रहा.... इन सब म्नामलों में सच्चा मित्र खुल कर बोलता है व् सही राह दिखा कर परिस्तिथियों में सुधार करता है
३ )बिला वजह बदलने को न कहे ;-
****************************************सच्चा मित्र विचारधाराओं को बदलने को लेकर,अपनी कसम खिला कर भावनात्मक दवाब ब
ना कर ,या क्रोध कर के दवाब नहीं डालता जो जैसा है स्वीकार है.यह बात आत्मविश्वास को बढ़ाती है
४ )श्रेष्ठ रूप को सामने ला सके :-
********************************** कई बार हम जीवन की नकारात्मक परिस्तिथियों का सामना करते -करते आत्म विश्वास खो देते हैं ऐसे में सच्चा मित्र जामवंत बन कर सामने आता है और हमें हमारी शक्तियों का अहसास करा देता है
पुनः ऊर्जा से लबरेज हो अपना श्रेष्ठ मुकाम पा सके
तो यह थे सच्चे दोस्तों के लक्षण अगर आपकी जिंदगी में ऐसा कोई दोस्त है तो आप खुशनसीब हैं और इन्हें अपने जीवन से जाने मत दीजिये
"रहिमन फिर -फिर पोइए टूटे मुक्ता हार "
देवयानी निगम
बी .कॉम (फाइनल इयर )
मुंबई महाराष्ट्र

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