शनिवार, 14 मार्च 2015

ॐ क्या परमात्मा निराकार निर्गुण हैं या साकार सगुण--







ॐ क्या परमात्मा निराकार निर्गुण हैं या साकार सगुण--------------



परमात्मा सिर्फ यदि ज्योति स्वरूप ही रहते,निर्गुण,निराकार ही होते ,तो इतने सृष्टि में जो रूप दृष्टिगोचर हो रहें हैं वे ना होते,हम सब रूप भी ना होते।क्योंकि हम सब भी तो परमात्मा के अंश ही तो हैं ।ऐसी कल्पना भी व्यर्थ की है।वो ज्योति को धारण करने के लिये कोई ना कोई आवरण,आकार तो बहुत जरूरी ही है।इसीलिये अपनी शक्ति अपने ऐश्वर्य के साथ परमात्मा सगुण रूप भी हैं और निर्गुण रूप भी हैं।
ऐसे समझिये जब आपके अन्दर कोई विचार चल रहा है तो वह निराकार है,अप्रत्यक्ष है,और जब आप उस विचार के अनुसार कार्य करेंगें,तो कोई आकार,कोई आवरण ,कोई सहारा तो चाहियेगा ही।फिर उसका आकार के अनुसार नाम भी।तो ये ही रूप तो सगुण-साकार रूप हैं,जो समय-समय पर अपनी विविध-विविध शक्तियों के साथ आते रहें हैं धरा-धाम पर परमात्मा।

                                           चित्र गूगल से साभार 
पाॅवरहाउस की बिजली अथवा ऊर्जा का उपयोग तभी सम्भव होता है,जब तारों के द्वारा जगह-जगह आकार बनाकर खम्भों में डाली जाती है और फिर जगह-जगह वितरित की जाती है,।तरह-तरह के उपकरण बनाकर फिर संचारित की जाती है और घर-घर में भिन्न-भिन्न तरह के उपकरण जैसे---पंखा ,वल्व,फ्रिज,हीटर आदि अनेकों प्रकार के बिजली के यन्त्र हम सब प्रयोग में लाते हैं
दिन-प्रतिदिन।अतः दोनो ही रूपों को मानना है और दोंनो ही रूप एक-दूसरे के पूरक हैं।पर जो प्रत्यक्ष में है,हम जिसको देख रहें हैं उससे तरह-तरह से व्यवहार भी कर सकते हैं,और उपयोग भी।इसलिये हमें तो सगुण रूप ही अति प्यारा हैं।

सुमित्रा गुप्ता

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