शनिवार, 14 मार्च 2015

मजबूत हैं हौसले ........... की मंजिल अब दूर नहीं




मजबूत हैं हौसले ........... की मंजिल अब दूर नहीं


आधुनिक और बदलते दौर ने जहाँ एक ओर हमें कई विसंगतियां दी है ,वहीँ हमें अपने तरीके से जीवन जीने की आजादी भी दी है | हमारे इसी बदलाव और लाइफस्टाइल से हमें कई सुविधाएँ भी मिली हैं ,इसमें कोई संशय नहीं | आज हमारे समाज में अगर सबसे ज्यादा बदलाव या क्रांति आई है तो वो है महिलाओं की स्थिति में ,जिसे नकारा नहीं जा सकता | इस अचानक हुए परिवर्तन से महिलाओं में एक सुखद अनुभूति का एहसास हुआ है , साथ ही समाज की सोच में हुए सकारात्मक बदलाव से उनकी छवि में निखार व् स्पष्टता दिखाई देती है | आज हमारे समाज में स्त्री व् पुरुष दोनों को सामान अधिकार मिले हैं | अब महिलाएं भी उच्च शिक्षा की अधिकारी हो गई हैं ,उन्हें भी वोट देने का अधिकार प्राप्त है | सबसे ज्यादा जो परिवर्तन देखने में आया है वो यह है कि आज लड़का-लड़की दोनों को पैतृक सम्पति में बराबर का हक है | लड़की जब चाहे अपने संपति के लिए दावा कर सकती है | आज स्त्री किसी पर बोझ नहीं है ,उसे नौकरी करने की पूरी आजादी है और वह अपने पसंद का कैरियर चुनकर एक बेहतर जिन्दगी बसर कर रही है |



                                       चित्र गूगल से साभार 
          पहले जब किसी लड़की की शादी होती थी तो उसके सारे निर्णय उसका पति और उसके ससुराल वाले लेते थे नतीजा क्या होता था एक औरत बेटे की उम्मीद में कई -कई बच्चे की माँ बन जाती थी जिससे उसका स्वास्थ्य प्रभावित होता था और बेहतर स्वास्थ्य सेवा के आभाव में कभी-कभी उसकी मौत तक हो जाती थी | पर अब ऐसा नहीं है ,अब उसके पास कम बच्चे पैदा करने का निर्णय लेने का भी अधिकार है | हालाँकि यह सारे अधिकार उन्हें पहले ही मिल चुके थे , लेकिन आज जो सबसे बड़ा परिवर्तन महिलाओं के जीवन में हुआ है वह है ,उनके खुद के सोच में आया व्यापक एवं परिपक्व  बदलाव |अब हर महिला अपने प्रति बेहद सजग एवं दृढ प्रतिज्ञ हो गई है जो उनके आत्मविश्वासी होने को दर्शाता है | अगर दिल में एक जोश हो ,कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो आपके आगे बढ़ने के सारे रास्ते साफ़ नजर आते हैं ,फिर वो कोई भी क्षेत्र हो खुद-बखुद रस्ते बनते जाते हैं और उपलब्धियां मिलती जाती है | बस जरुरत है एक जुनून की,एक संकल्प की फिर सारे अरमानों ,सारे हौसलों को उड़ान मिलने लगती है
                               दृढ प्रतिज्ञ की एक अलख अपने अन्दर जन जग जाता है तो पूरी कायनात उसे हासिल करवाने में जुट जाती है | आज महिलाएं भारत के शहरों से ही नहीं बल्कि गाँव और छोटे शहरों से भी बड़ी भारी तादाद में मल्टीनेशनल कंपनियों से जुड़ रही हैं | आज पूरे  विश्व में महिलाओं की भूमिका में  एक आश्चर्यजनक परिवर्तन हुआ है | आज हर क्षेत्र में महिला पुरुष समकक्ष खड़ी है , फिर वो किचेन हो या राजनीति ,हर जगह अपने जीत का पताका फहरा रही हैं | आज बड़ी भारी संख्या में महिलाएं राजनीति की ओर भी रूख कर रही हैं जबकि पहले कोई दिग्गज महिला ही राजनीति में कदम बढाती थी | पहली महिला आईपीएस 'किरण वेदी 'जी आज अनगिनत महिलाओं की आदर्श हैं | हालाँकि यहाँ तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है , पर पहुँच जाने के बाद का आनंद ही कुछ और है | ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की सक्रियता को देखकर लगता है जैसे आत्मविश्वास की लहर वहां भी चल चुकी है | आज महिलाएं एक ओर तो आत्मनिर्भर बन गई पर उन्हें नित् नये भावनात्मक एवं  शारीरिक परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है , इसके बावजूद भी वे निरंतर अपनी पहचान को बुलंद कर रही हैं |
घर बाहर दोनों के बीच तालमेल बैठाकर  अपने सपनों को एक नया उड़ान देना ,वास्तव में एक महिला के लिए ही संभव है | कहते हैं किसी के दोनों हाथों में लड्डू नहीं होते पर स्त्री ने अपनी इक्षा शक्ति से सिद्ध कर दिया है की वो दोनों मोर्चों पर सफल है |एक माँ जल्द्दी –जल्दी बच्चे का लंच पैक कर रसोई के बर्तन निपटा कर कार्यालय जाती है .......... वहां एक बॉस बन कर फैसले लेती है पुनः घर आ कर एक प्रिय पत्नी ,माँ और बहू में परिवर्तित हो जाती है |हां ! कठिन जरूर है पर असंभव नहीं ,आज की कामकाजी महिला के पैरों के नीचे जमीन भी है और मुट्ठी में सपनों का आसमान भी |ऊपर से जब महिलाएं अपने कर्म के क्षेत्रों में तरक्की करती हैं तो उनके अन्दर गजब का आत्मविश्वास बढ़ता है और यही आत्मविश्वास उन्हें सतत कर्मशील बनाता है | महिलाओं के प्रति आए इसी परिवर्तन ने उनके हाथों में नेतृत्व की कमान थमाई है ,जिसके कारण वे एक नई दुनियां में कदम बढ़ा रही हैं ,जहाँ सफलताएँ उनका बाहें फैलाकर इन्तजार कर रही है | आज उनके पास आजादी है,नाम है,शोहरत है तथा हसरतों की ऊँची उड़ान है |
    आज महिलाएं अपने तथा अपने परिवार के प्रति ज्यादा सजग एवं प्रयत्नशील है ताकि उन्हें किसी किस्म की दिक्कत व् परेशानी का सामना न करना पड़े | महिलाओं के अन्दर ईश्वर प्रदत जबरदस्त संतुलन है जिसकी वजह से वह अपने परिवार तथा करियर के बीच सामंजस्य बिठाकर अपने सपनों को साकार कर रही है | बीते कुछ वर्षों में महिलाओं ने जिस तेजी से अपनी कामयाबी का परचम लहराया है उसका सीधा असर उनके कार्यक्षेत्र एवं जीवनशैली में दिख रहा है | आज महिलाएं इंटरनेट के जरिये पूरी दुनियां से अपना जुड़ाव बनाई हैं ,जिसका शाश्वत रूप फेसबुक जैसे सोशल साईट पर बखूबी देखा जा सकता है | महिलाओं की जिन्दगी में बढ़ता हुआ सकारात्मक बदलाव ने मुझे एक कविता लिखने पर बाध्य कर दिया ......

आँखों में असंख्य हसरतें हैं 
ख्वाब भी अब हकीकत में बदलें हैं 
हौसलों की उड़ान है,और है एक ऐसा जहान,
जहाँ अरमानों की एक अलग दुनियां अंगड़ाई लेती है 
बांहें फैलाए हैं मेरी अनगिनत चाहतों का आसमान
जहाँ न बंदिशें हैं और न ही कोई रुकावटें हैं 
वक्त बदला बंदिशें बदली , टूट गई अडचनों की जंजीर 
और साथ ही बदल गई समाज में महिलाओं की तस्वीर 
घर की दहलीजों से निकलकर कर्म राह पर चल पड़े 
जहाँ से शुरू हुए कामयाबियों के अनगिनत सिलसिले .........!!!

संगीता सिंह ''भावना''

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