गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

स्टीफन हॉकिंग :हिम्मत वाले कभी हारते नहीं

स्टीफन हॉकिंग :हिम्मतवाले कभी हारते नहीं 






संक्षिप्त परिचय

स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी, 1942 को ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में हुआ था। गौरतलब हैकि यही वह तारीख थी, जिस दिन महान वैज्ञानिक गैलिलियो का भी जन्म हुआ था। चूंकि वे एक मेधावी छात्र थे, इसलिए स्कूल और कॉलेज में हमेशा अव्वल आते रहे। मैथमेटिक्स को प्रिय विषय मानने वाले स्टीफन हॉकिंग में बड़े होकर अंतरिक्ष-विज्ञान में एक खास रुचि जगी। यही वजहथा किजब वे महज 20 वर्ष के थे, कैंब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय में रिसर्च के लिए चुन लिए गये इसके बाद इसी विषय में उन्होंने पीएचडी भी की।

एक जंग जो खुद से जीती 
                    २१ वर्ष की आयु तक हॉकिंग  भी सामान्य मेधावी बालक थे जिसकी आँखों में सैकड़ो सपने थे  एक दिन वो घटना घट गयी जिसने उन्हें एक अलग कैटेगिरी में धकेल दिया ।  जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टियाँ  मानाने के मानाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे , वो सीढ़ी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो तुरंत ही नीचे गिर पड़े।उन्हें डॉक्टर के पास ले जायेगा शुरू में तो सब ने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी पर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें बड़े डोक्टरो के पास ले जाया गया , जहाँ ये पता लगा कि वो एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त है जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस ।इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है।डॉक्टरों ने कहा हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हॉकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली थी और उन्होंने कहा की मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा । उस समय सबने उन्हें दिलासा देने के लिए हाँ में हाँ मिला दी थी, पर आज दुनिया जानती है की हॉकिंग ने जो कहा वो कर के दिखाया ।अपनी इसी बीमारी के बीच में ही उन्होंने अपनी पीएचडीपूरी की और अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से विवाह किया तब तक हॉकिंग का पूरा दाहिना हिस्सा ख़राब हो चूका था वो stick के सहारे चलते थे ।
क्या है  योगदान :
             दरअसल, जिस क्षेत्र में योगदान के लिए उनको याद किया जाता है, वह कॉस्मोलॉजी ही है। कॉस्मोलॉजी, जिसके अंतर्गत ब्रह्माण्ड  की उत्पत्ति, संरचना और स्पेस-टाइम रिलेशनशिप के बारे में अध्ययन किया जाता है। और इसीलिए उन्हें कॉस्मोलॉजी का विशेषज्ञ माना जाता है, जिसकी बदौलत वे थ्योरी ऑफ 'बिग-बैंग और 'ब्लैक होल्स की नई परिभाषा गढ़ पाने में कामयाब हो सके हैं।



कुछ सवाल जवाब 
 दुनिया के महान वैज्ञानिक हॉकिंग से बात की बीबीसी संवाददाता टिम मफ़ेट ने।
पछताने से अच्छा है वो करो जो कर सकते  हैं :-

अपने जीवन पर बन रही इस फ़िल्म के बारे में पूछने पर हॉकिंग कहते हैं ''यह फ़िल्म विज्ञान पर केंद्रित है, और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे लोगों को एक उम्मीद जगाती है। 21 वर्ष की उम्र में डॉक्टरों ने मुझे बता दिया था कि मुझे मोटर न्यूरोन नामक लाइलाज बीमारी है और मेरे पास जीने के लिए सिर्फ दो या तीन साल हैं। इसमें शरीर की नसों पर लगातार हमला होता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इस बीमारी से लड़ने के बारे में मैने बहुत कुछ सीखा''

हॉकिंग का मानना है कि हमें वह सब करना चाहिए जो हम कर सकते हैं, लेकिन हमें उन चीजों के लिए पछताना नहीं चाहिए जो हमारे वश में नहीं है।


किस उपलब्धि पर है सबसे ज्यादा गर्व :-
हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''



'परिवार और दोस्तों के बिना कुछ नहीं'

यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''

गॉड पार्टिकल:दुनिया का विनाश  
          हॉकिंग ने आगाह किया है कि महज दो साल पहले वैज्ञानिकों ने जिस मायावी कण गॉड पार्टिकल’ की खोज की थी उसमें समूचे ब्रह्मांड को तबाह-बरबाद करने की क्षमता है।
एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार हॉकिंग ने एक नई किताब स्टारमस’ के  में लिखा कि अत्यंत उच्च उर्जा स्तर पर हिग्स बोसोन अस्थिर हो सकता है। इससे प्रलयकारी निर्वात क्षय की शुरुआत हो सकती है जिससे दिक् और काल ढह जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस ब्रह्मांड में हर जो चीज अस्तित्व में है हिग्स बोसोन उसे रूप और आकार देता है।
हॉकिंग ने बतायाहिग्स क्षमता की यह चिंताजनक विशिष्टता है कि यह 100 अरब गिगा इलेक्ट्रोन वोल्ट पर अत्यंत स्थिर हो सकती है। वह कहते हैंइसका यह अर्थ हो सकता है कि वास्तविक निर्वात का एक बुलबुला प्रकाश की गति से फैलेगा जिससे ब्रह्मांड प्रलयकारी निर्वात क्षय से गुजरेगा।
हॉकिंग ने आगाह कियायह कभी भी हो सकता है और हम उसे आते हुए नहीं देखेंगे। बहरहालउन्होंने कहा कि इस तरह के प्रलय के निकट भविष्य में होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन उच्च उर्जा में हिग्स के अस्थिर होने के खतरे इतने ज्यादा हैं कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


स्वर्ग-मृत्यु के बाद जीवन जैसी अवधारणा परियों के किस्से कहानी की तरह है.
और उन लोगों के लिए है जो मौत से डरते हैं.
‘द गार्डियन’ को दिए गए साक्षात्कार में ‘ए ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम’ के लेखक और मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग कहा कि जब मस्तिष्क अपने आखिरी समय में होता है तो उसके बाद ऐसा कुछ नहीं होता.
हाकिंग 21 साल की उम्र से ही मोटर न्यूरान बीमारी का इलाज करा रहे हैं. उन्होंने कहा मैं पिछले 49 साल से जल्द मरने की संभावना के साथ जी रहा हूं लेकिन मुझे मरने की कोई जल्दबाजी नहीं हैं. मेरे पास बहुत कुछ है जो मैं पहले करना चाहता हूं.
उन्होंने कहा मैं दिमाग को एक कंप्यूटर की तरह समझता हूं जो उसके अलग-अलग हिस्सों के असफल होने की वजह से काम करना बंद कर देता है.
कंप्यूटर के खत्म होने के बाद कोई स्वर्ग अथवा मौत के बाद जीवन जैसी बात नहीं होती. जो लोग अंधेरे से डरते हैं यह उनके लिये परियों के किस्से कहानियों जैसा है.
साक्षात्कार के दौरान हाकिंस ने मृत्यु के बाद के जीवन की अवधारणा को खारिज कर दिया और उन्होंने अपनी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करते हुए धरती पर बेहतर जीवन की आवश्यकता पर बल दिया
एलियंस के बारे में 
 उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर दिया है और वैश्विक स्तर पर एक आशंकाभरी बहस को भी जन्म दिया है. क्या धरती एलियन्स के निशाने पर आ सकती है? क्या किसी अंतरग्रहीय युद्ध में इंसानी प्रजाति और इस शानदार ग्रह का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है? यदि हां, तो ऐसा कब तक संभव है और क्या हम इसे टाल सकते हैं? डिस्कवरी टीवी चैनल पर प्रसारित किए जाने वाले कायर्क्रमों की बेहद चर्िचत श्रृंखला में स्टीफन हाकिंग ने मोटे तौर पर दो बातें कही हैं। पहली. अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना वास्तविक है, और दूसरी. एलियन्स से मेलजोल के प्रयास सुखद परिणाम ही लेकर आएं, यह जरूरी नहीं। इस संपर्क का परिणाम लगभग वैसा ही हो सकता है, जैसा क्रिस्टोफर कोलंबस के आने का 'नई दुनिया' (अमेरिका) के मूल निवासियों पर हुआ था। उनका मानना है कि जो एलियन्स धरती पर आएंगे वे असल में अपने ग्रहों पर संसाधनों का इतना अधिक दोहन कर चुके होंगे कि ये ग्रह प्राणियों के रहने योग्य नहीं रह गए होंगे। वे विशाल अंतरिक्षयानों में ही रहने को मजबूर होंगे और रास्ते में जो भी ग्रह आएगा, उसके संसाधनों को निशाना बनाएंगे। उनका बर्ताव दोस्ताना ही हो, यह जरूरी नहीं है।

‘ए ब्रीफ  हिस्ट्री ऑफ टाइम 
स्टीफन हाकिंग को लोकरुचि विज्ञान लेखन की कला में भी महारत हासिल है। उनकी एक पुस्तक ‘ए ब्रीफ  हिस्ट्री ऑफ टाइम’ ने आम जन की जिज्ञासाओं को न सिर्फ शांत ही किया है वरन् और जानने के लिये उत्सुक भी बनाया है। इस क्षेत्र में आगे आने के लिये इस पुस्तक ने कई युवाओं को आकृष्ट किया है। इसके बाद इसे अपडेट करते हुए उन्होंने लीनार्ड म्लोडिनोव के साथ ए ब्रीफर हिस्ट्री ऑफ टाइमलिखी है। इस पुस्तक में क्वांटम मेकेनिक्स, स्ट्रिंग थ्योरी, बिग बैंग थ्योरी और कई अन्य क्लिष्ट विषय अत्यंत सरल भाषा में समाहित हैं। ‘ब्लेक होल्स एण्ड बेबी यूनिवर्सेस एण्ड अदर एसेज और दी यूनिवर्स इन ए नटशैल’ ब्रह्माण्ड की परतों को उघाड़ती उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है। उनकी एक और पुस्तक ‘थ्योरी ऑफ एव्हरी थिंग’ है। इसमें उन्होंने सात व्याख्यानों की एक ाृंखला प्रस्तुत की है जिसमें बिगबैंग से लगा कर ब्लेक होल तथा स्ट्रिंग सिद्धांत का सिलसिलेवार वर्णन है। इस पुस्तक से हमें ब्रह्माण्ड के इतिहास पर उनके दृष्टिकोण से परिचय मिलता है। हाल ही में उनकी पुस्तक ‘ग्रेंड डिजाइन’ प्रकाशित हुई है। यह भी बेमिसाल है। इसमें कई ऐसे प्रश्नों को उठाया गया है जिनके उत्तर की तलाश में कई-कई महापुरुषों ने अपना सारा जीवन लगाया है। इसमें उन्होंने ब्रह्माण्ड कब और कैसे अस्तित्व में आया, क्यों यहाँ कुछ है, आखिर वास्तविकता क्या है, प्रकृति के नियम ऐसे क्यों बने हैं जिसमें हम जैसे प्राणियों का उदय हो सका है, क्या कोई भगवान है ब्रह्माण्ड जैसी इस महारचना के निर्माण के पीछे या यह विज्ञान सम्मत है आदि जैसे झकझोरने वाले प्रश्नों को हाकिंग ने बड़ी खूबसूरती से अपनी इस पुस्तक में उठाया और उत्तर देने का प्रयास किया गया है। इसतरह अपनी अपंगता पर अकल्पनीय विजय पाने वाले वे आज की दुनिया के बिरले उदाहरण एवं रोल मॉडल बन कर सामने आये हैं। बच्चे भी उनकी नजर से बचे नहीं हैं। ब्रह्माण्ड जैसे विषय में उनकी रुचि जगाने और उन्हें प्रेरित करने के लिये उन्होंने अपनी बेटी लूसी के साथ ‘जार्ज्स सीक्रेट की टू दी यूनिवर्स’ और ‘जार्ज्स कॉस्मिक ट्रजर हंट’ लिखी है। वे पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष में जीवन की खोज के अभियान को समर्थन नहीं देते हैं। अपनी गणितीय अवधारणाओं के आधार पर वे मानते हैं कि अंतरिक्ष इतना विशाल है कि कई ऐसी जगहें अवश्य ही है जहाँ जीवन का होना निश्चित है। लेकिन वे सलाह देते हुए कहते हैं कि हमें उनसे संपर्क करने में से बचना चाहिये क्योंकि संपर्क होने पर एलियन संसाधनों की तलाश में पृथ्वी पर हमला करने सें नहीं चूकेंगे।
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अविस्मर्णीय भारत यात्रा 
 स्टीफन  हॉकिंग की भारत यात्रा ने विज्ञान में रुचि रखने वाले भारतवासियों को मंत्रमुग्ध सा कर दिया। ब्रिटेन के वि·श्वविख्यात कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रो. स्टीफन हाकिंग को जिजीविषा का एक अप्रतिम उदाहरण कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। शारीरिक रूप से भले ही वे अक्षम हैं किन्तु उनकी मानसिक पारंगतता अद्वितीय हैं। भौतिकशास्त्र और खगोलशास्त्र जैसे जटिल विषयों में उन्होंने जो काम किया है, वह अद्वितीय है।
"ब्लैक होल्स' अथवा "श्याम विवर' पर शोध कर उन्होंने एक ऐसा सिद्धान्त प्रतिपादित है जिसकी आधिकारिक काट अभी तक सामने नहीं आई है।अपनी भारत यात्रा के
 दौरान प्रो. हाकिंग दिल्ली में थे जहां राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन से एक औपचारिक भेंट और कुछ अनौपचारिक कार्यक्रमों के अलावा उन्होंने अपना आधिकारिक व्याख्यान दिया। 17 जनवरी को नई दिल्ली के सीरी फोर्ट सभागार में अल्बर्ट आइंस्टाइन व्याख्यानमाला के अंतर्गत प्रो. हाकिंग ने "भविष्य का अनुमान: खगोल विज्ञान से श्याम विवर तक' विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसका आयोजन "सेन्टर फार फिलास्फी एंड फाउंडेशन आफ साइंस' संस्था ने किया था।
इसी विषय पर विश्व भर में सराही गई पुस्तक "ए ब्रीफ हिस्ट्री आफ टाइम' (समय का संक्षिप्त इतिहास) के लेखक प्रो. हाकिंग ने अपने व्याख्यान में कहा कि भविष्य का आकलन करना लगभग असंभव है और स्वयं ई·श्वर भी इसका अनुमान नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के नियम के कारण भविष्य का सही आकलन करना टेढ़ी खीर है। किसी कण की तरंगित क्रियाओं को ही समझा जा सकता है, उसकी वास्तविक स्थिति और गति को समझना असंभव है। मानव जाति ने हमेशा ही भविष्य पर नियंत्रण अथवा कम से कम, आकलन करना चाहा है कि आगे क्या होगा। यही कारण है कि खगोल विज्ञान इतना प्रसिद्ध हुआ है।
दुनिया का "जीवित आइंस्टाइन' कहे जाने वाले प्रो. हाकिंग का व्याख्यान सुनने आए लोगों से सभागार भरा हुआ था। उनके विषय में पिछले कई दिनों से छपते आ रहे समाचारों के कारण दिल्ली में उनकी खासी प्रसिद्धि हो चुकी थी। सभागार पहुंचने वाले सभी मार्गों पर यातायात अवरुद्ध सा हो गया था। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण बड़े-बड़े अधिकारी और महिलाएं, बच्चे अपनी कारों को छोड़कर पैदल ही सभागार की ओर लपकते दिख रहे थे। वरिष्ठ नौकरशाह, अधिकारी, नेता, मंत्री, वैज्ञानिक, नीति-निर्धारक, पत्रकारों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में विकलांग भी व्याख्यान सुनने आए थे। कार्यक्रम 5 बजे शुरू होना था पर चूंकि प्रो. हाकिंग स्वयं यातायात में फंसे थे अत: 5.40 से पहले उनका व्याख्यान शुरू न हो सका। अपना व्याख्यान शुरू करने से पहले प्रो. हाकिंग ने कम्प्यूटर के माध्यम से "वाइस सिंथेसाइजर' की आवाज में पूछा-"कैन यू हियर मी?' (क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं?) जब श्रोताओं ने हां, कहा तब उन्होंने एक के बाद एक ब्राह्मांड और खगोलशास्त्र के गूढ़ रहस्यों पर से पर्दा उठाना शुरू किया।
बच्चो के लिए अच्छी खबर :कॉमिक किताब के पात्र होंगे हॉकिंग 
प्रख्यात ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग एक कॉमिक किताब के पात्र होंगे और यह किताब उनकी जिंदगी के तमाम पहलुओं के बारे में लोगों को बताएगी। ‘स्काई न्यूज’ की एक रिपोर्ट कहती है कि 71 साल के हॉकिंग जल्द ही एक कॉमिक किताब के पात्र के तौर पर पेश किए जाएंगे। इस किताब में हॉकिंग के कॉलेज के दिनों, कैंब्रिज में एक शोधकर्ता के तौर पर उनके काम और उनके कुछ अहम आविष्कारों के बारे में बताया जाएगा।
इस कॉमिक किताब का नाम है ‘स्टीफन हॉकिंग : रिडल्स ऑफ टाइम एंड स्पेस’। इसके लेखकों ने बताया कि इससे जानेमाने वैज्ञानिक के व्यक्तित्व और उनसे जुड़े मिथ के बारे में भी जानकारी मिलेगी। कलाकार जेच बैसेट ने कहा, ‘इस किताब में सबसे खास बात यह होगी कि इसमें यह बताया जाएगा कि वैज्ञानिक के दिमाग में क्या चल रहा है। तस्वीरों के जरिए एक गतिशील अंदाज में उनके कुछ अहम आविष्कारों को भी लोगों के सामने लाया जाएगा।’

स्टीफन हॉकिन्स को सर्वोच्च सम्मान 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मशहूर गणितज्ञ प्रो.स्टीफन हॉकिंग को अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "मेडल ऑफ फ्रीडम" से सम्मानित करने की घोषणा की है। 
फेस बुक पर भी हैं हॉकिंग 
72 वर्षीय हाकिंग 7 अक्तूबर को फेसबुक में शामिल हुए और तब से उनके आधिकारिक पन्ने को 14,15,213 लाइक मिले हैं.हाकिंग ने अपने पहले पोस्ट में लिखा, ‘‘मुझे हमेशा आश्चर्य रहा कि किस चीज से ब्रह्मांड टिका है. काल और दिक् शायद हमेशा पहेली बने रहें, लेकिन इसने मेरी तलाश नहीं रोकी.’’ उन्होंने लिखा, ‘‘एक दूसरे के साथ हमारे रिश्ते अनंत तक बढ़े हैं और अब मेरे पास मौका है, मैं आपके साथ यह सफर साझा करने के लिए उत्सुक हूं. जिज्ञासु रहें, मैं जानता हूं मैं हमेशा रहूंगा.’’ दुर्लभ एमियोट्रोफिक लैटरल सलेरोसिस बीमारी से ग्रस्त। लाइवसाइंस की रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के पन्ने की देखरेख हाकिंग की टीम करती है और जब भौतिकीविद् खुद पोस्ट डालते हैं तो उसपर ‘‘एसएच’’ का हस्ताक्षर होता है.

प्रस्तुतकर्ता :अटूट बंधन परिवार 

अपने पाठको के लिए जानकारी उपलब्ध कराने हेतू  और स्टीफन हॉकिंग को सम्मान देने के लिए हमने यह जानकारी गूगल से विभिन्न श्रोतों से एकत्र की हैं समस्त चित्र गूगल से लिए हैं ,इसके लिए हम गूल का आभार व्यक्त करते हैं 

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