शनिवार, 31 जनवरी 2015

तुलसी का बिरवा





जैसे तुलसी के बिरवा को हर आँगन तरसा करता है


                                                                     बागवानी का शौक है तो घर  बहुत सारे गमले लगा रखे  हैं देशी -विदेशी पौधों की छटा देखते ही बनती है ....उन सब के बीच में है तुलसी का पौधा जिसमें मेरे प्राण बसते हैं तुलसी को चुनरी उढाना ,जल अर्पित करना , सुबह खाली पेट तुलसी की पांच पत्तियाँ  खाना और शाम को तुलसी के चौरे पर दिया जलना मेरी दिनचर्या का हिस्सा है |एक दिन बच्चे पूछने लगे "मम्मी इतने सारे प्लांट हैं पर आप सबसे ज्यादा तुलसी को ही क्यों प्यार करती हैं |अब आज कल के बच्चे तो आप जानते ही हैं कि कितने इंटेलीजेंट हैं ... छोटा मोटा उत्तर देकर उन्हें शांत तो नहीं किया जा सकता इसी लिए उन्हें समझाने के लिए तुलसी के धार्मिक ,अध्यात्मिक ,रोग नाशक ,औषिधिय  ,वास्तु दोष नाशक ,कुछ रोचक फिल्मी जानकारी सब हासिल की वही  सारी  जानकारी आप सब के साथ शेयर कर कर रही हूँ ............. तो चलिए जानते हैं तुलसी के बारे में ........

जगत ....पादप  

गण ....लेमिएल्स 

कुल ....लामिएसी 
प्रजाति ....ओसीमम 
जाति .... ओसीमम सेंट्रम 

तुलसी की प्रजातियाँ 
१- ऑसीमम अमेरिकन (काली तुलसी) गम्भीरा या मामरी।
२- ऑसीमम वेसिलिकम (मरुआ तुलसी) मुन्जरिकी या मुरसा।
३- ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम।
४- आसीमम ग्रेटिसिकम (राम तुलसी / वन तुलसी 
५- ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम (कर्पूर तुलसी)।
६- ऑसीमम सैक्टम तथा
७- ऑसीमम विरिडी।


तुलसी -

             (ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री  तथा शाकीय, औषधीय पौधा  है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और १ से ३ फुट ऊँचा होता है। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच  लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते है और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता है। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती है। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती है।


तुलसी का धार्मिक महत्व :-
अधिकांश हिंदू परिवारों में तुलसी का पौधा लगाने की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है। तुलसी को देवी मां का रूप माना जाता है। कभी-कभी तुलसी का पौधा कुछ कारणों से सुख जाता है। सूखे हुए तुलसी के पौधे को घर में नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। एक पौधा सूख जाने के बाद तुरंत ही दूसरा तुलसी का पौधा लगा लेना चाहिए। सुखा हुआ तुलसी का पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है। इससे विपरित परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं। घर की बरकत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी वजह से घर में हमेशा पूरी तरह स्वस्थ तुलसी का पौधा ही लगाया जाना चाहिए।
1 मान्यता है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती और अन्य बुराइयां भी घर और घरवालों से दूर ही रहती हैं।

2 तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

3 कार्तिक माह में विष्णु जी का पूजन तुलसी दल से करने का बडा़ ही माहात्म्य है। कार्तिक माह में यदि तुलसी विवाह किया जाए तो कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।




श्री तुलसी प्रदक्षिणा मंत्र :
यानि कानि च पापानि,
जन्मान्तर कृतानि च,
तानि तानि प्रनश्यन्ति,
प्रदक्षिणायाम् पदे पदे ।आपकी परिक्रमा का एक एक पद समस्त पापों का नाश कर्ता है


तुलसी का आध्यात्मिक महत्व  :-

                                  वर्षो पहले से ही घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगाने की परम्परा प्रचलित है। महिलायें इसकी प्रतिदिन पूजा करके जल अर्पित करती है। घर से निकलने से पूर्व तुलसी के दर्शन करना शुभ माना जाता है। तुलसी का वृक्ष औषधीय गुणों से परिपूर्ण माना गया है। इनकी पत्तियों में कीटाणु नष्ट करने का एक विशेष गुण है। इसलिये मन्दिरों में चरणोदक जल में तुलसी की पत्तियां तोड़कर डाली जाती है जिससे जल के सारे कीटाणु नष्ट हो जाये और जल शुद्ध हो जाये।

तुलसी करे दूर वास्तु दोष :-

1. वास्तुदोष दूर करने के लिए इसे दक्षिण-पूर्व से लेकर उत्तर पश्चिम तक किसी भी खाली कोने में लगाया जा सकता है।
2. तुलसी का पौधा किचन के पास रखने से घर के सदस्यों में आपसी सामंजस्य बढ़ता है।
3. पूर्व दिशा में यदि खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखा जाए तो आपकी संतान आपका कहना मानने लगेगी।
4. अगर संतान बहुत ज्यादा जिद्दी और अपनी मर्यादा से बाहर है तो पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रोज उसे किसी ना किसी तरह खिला दें।
5. यदि आपकी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो तो तुलसी के पौधे को दक्षिण-पूर्व में रखकर उसे नियमित रूप से जल अर्पण करें। इस उपाय से जल्द ही योग्य वर की प्राप्ति होगी।
6. यदि आपका कारोबार ठीक से नहीं चल रहा है तो तुलसी के पौधे को नैऋत्य कोण में रखकर हर शुक्रवार को कच्चा दूध चढ़ाएं।
7. नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो ऑफिस में जहां भी खाली जगह हो वहां पर सोमवार को तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपड़े में बांधकर कोने में दबा दे।इससे आपके संबंध सुधरने लगेगें।
8. शरीर में नाक, कान वायु, कफ, ज्वर खांसी और दिल की बीमारियों पर तुलसी के पत्ते रोग दूर करने में सहायक हैं।
9. तुलसी एकमात्र पौधा है जो जीवन को सुखमय बनाने में सक्षम है।

तुलसी एक गुणकारी औषधी है

तुलसी को प्राचीन समय से मानव शरीर के लिए उपयोगी बताया गया है। तुलसी के पौधे को घर के आंगन में लगाना प्राचीन काल से ही चला आ रहा है जिसका अपना महत्व है। पावन तुलसी को घर के आंगन में लगाने के कारण घर का वातावरण शुद्ध रहता है। वैदिक काल से चिकित्सकों द्वारा तुलसी का उपयोग उपचार के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। तुलसी की पत्तियों और बीजों के गुणों को सम्पूर्ण विश्व ने स्वीकारा है। तुलसी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है जो महामारियों से शरीर की रक्षा करता है।
विश्व में तुलसी का प्रयोग किया जाने लगा है। इसकी सुगन्ध, पोषक तत्व, विटामिन की वजह से वैज्ञानिकों ने तुलिसी के गुणों को पूरे विश्व के सामने उजागर किया है।
तुलसी का उपयोग किन बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। प्राचीन समय से ही तुलसी का प्रयोग ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने और रक्त शर्करा को स्थिर करने के लिए किया जाता रहा है। साथ ही इसका उपयोग मधुमेह, नपुंसकता और बांझपन के साथ-साथ एलर्जी दूर करने के लिए किया जाता है।
सूजनरोधी गुण 
तुलसी के पत्तों में मौजूद यूजीनाॅल सिट्रोनिलाॅल, लिनालाल जैसे तत्वों से आंतों की सूजन और जलन दूर होती है इसके साथ-साथ जोड़ो की गठिया में तुलसी के पत्ते लाभकारी होते हैं।

नेत्र विकार 
तुलसी में विटामिन ए और जियानथिन मौजूद होने की वजह यह नेत्र विकार को दूर करने में लाभदायक है। प्रतिदिन रात को सोने से पहले काली तुलसी जिसे श्यामा तुलसी भी कहा जाता है। इसके पत्तों के रस की दो बूंदे आंखों में डालने से आंखों की जलन दूर होती है और यह रतौंधी जैसी समस्या को दूर करता है।
मुंह संबंधी संक्रमण में 
प्रतिदिन तुलसी के कुछ पत्तों को चबाने से मुंह संबंधी विकार तो दूर होते ही हैं साथ ही यह मुंह की दुर्गंध भी दूर करती है। और आपको तरोताजा रखती है।

गुर्दे की पत्थरी में लाभकारी 
यदि गुर्दे की पत्थरी है तो आप 6 माह तक प्रतिदिन तुलसी के पत्ते का रस शहद के साथ मिलकार सेवन करें यह गुर्द की पत्थरी से मुक्ति दिला सकता है। तुलसी गुर्दे को मजबूती देती है।

त्वचा संबंधी विकार में तुलसी का प्रयोग 
तुलसी में मौजूदा विटामिन होने की वजह से तुलसी के पत्तों का लेप बनाकर उसे तेल के साथ लगाने से दाद और अन्य त्वचा संबंधी विकार दूर होते हैं। यह सफेद दाग के उपचार में भी लाभकारी है।

सिर का दर्द में तुलसी 
यदि सिर दर्द से परेशान हों तो 1 कप पानी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर उसे आधा कर लें और हर एक घंटे के बाद दो चम्मच इसकी लें। यह सिर का दर्द दूर करेगा। यदि आप तुलसी के पत्तों को पीसकर चंदन के साथ इसका लेप माथे पर लगाते हैं तो इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी और सिर दर्द में राहत भी।

गले की समस्या 
यदि गले में खराश हो तो तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसका गरम पानी से गरारे करें। एैसा करने से गले को आराम मिलता है।

बुखार में तुलसी का उपयोग
बुखार में तुलसी रामबाण की तरह काम करती है। थोड़ी सी इलायची, चीनी और तुलसी के पत्तों को 2 गिलास पानी में दूध मिलाकर उबालें और इसे ठंडा कर लें। फिर रोगी को दो से तीन घंटे के बाद देतें रहे। एैसा करने से बुखार का तापमान गिर जाएगा। बच्चों में बीमारी में तुलसी का उपयोग यदि बच्चों को कफ, बुखार, उल्टी और दस्त हो तो तुलसी के पत्तों का रस बच्चे को देते रहने से लाभ मिलता है।

श्वास संबंधी रोग 
ब्रोन्काइटिक्स, खांसी, इन्फलूएंजा और अस्थमा को दूर करने के लिए तुलसी के नए और ताजे पत्तों को अदरक और शहद में मिलाकर उबाल लें और रोगी को दें। कुछ दिनों तक नियमित सेवन करने से लाभ मिलेगा।

तुलसी के अन्य फायदे 
1. यदि पैरों को लकवा हो तो तुलसी के बीजों को पीसकर नियमित लेप करें।

2. भोजन करने का मन न हो, या भूख नहीं लग रही हो तो तुलसी के बीजों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से लाभ होगा।

3. स्मरण शक्ति मे भी तुलसी लाभकारी है। तुलसी की पत्तियों का रस सुबह खाली पेट पानी के साथ लें। यह आपकी स्मरण शक्ति को बढाएगा।

4. ठंठ में बुखार से यदि परेशानी हो रही हो तो आप पुदीना, तुलसी की पत्ती और अदरक को 5-5 ग्राम लेकर काढ़ा बना लें और इसका सेवन करें इससे आपको पूरा फायदा होगा।

5. गले में यदि दर्द हो तो शहद में तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर सेवन करें।

6. तुलसी की पत्तियों को सुखाकर उसका पेस्ट बना लें और चेहरे पर इस पेस्ट को लगा लें। एैसा करने से चेहरे में कांति आती है।

जो इंसान तुलसी की पत्तियों का सेवन रोज करता है वह अनेक प्रकार के गंभीर रोगों से मुक्त रहता है। सामान्य रोग जैसे जुकाम, सर्दी, बुखार, खुजली, दांत का दर्द, मुहांसे, दस्त, गले का दर्द, आंखों का रोग जैसी अनेक समस्याएं खत्म हो जाती है। इसलिए प्रचीन समय से ही तुलसी को महत्व दिया जाता रहा है। तुलसी की माला गले में पहनने से भी लाभ मिलता है।

कैसे करे तुलसी के पौधे की देखभाल :-


                   अगर आपके घर के किसी कोने में कच्ची जगह है तो वहीं पर तुलसी का पौधा रोपें, क्योंकि जमीन में लगाए गए पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं और वह लंबे समय तक जीवित रहे सकता है। सामान्य दिनों में तुलसी को धूप में रखें और अगर सर्दी ज्यादा है तो इसे छाँव में ही रखें। 

तुलसी की जड़ों में नमी होनी चाहिए, ज्यादा पानी न दें। इससे उसकी जड़ें गल जाती हैं। तुलसी की तरह दूसरे पौधों की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। कुछ प्लांट इनडोर होते हैं जिन्हें छाँव में रखना आवश्यक है। अगर किसी कारणवश छाँव नहीं दी जा सके तो नेट आदि लगाकर पौधों को सीधे सूर्य की रोशनी से बचाया जा सकता है। 

फिल्मों से तुलसी की रोचक दास्तान :-
                                       फिल्मों में तुलसीका एक रोचक प्रसंग आप को बताने जा रही हूँ , इसके लिये हमें याद करना होगा मीना कुमारी को, जो फिल्म भाभी की चूड़ियां में उसी बिरवे के आगे गाती हैं, ज्योति कलश छलके। इस गीत की शूटिंग के पहले मीनाकुमारीजी ने काफी मेहनत की थी। सुबह-सुबह उठकर हिन्दू महिलाओं को पूजा करते देखना उनके लिये एक अलग ही अनुभव था। स्वयं मुस्लिम रीति-रिवाजों में पढ़ी-बढ़ी मीना कुमारी इस गीत को परफैक्ट करना चाहती थी। इसलिये उन्होंने हिंदू महिलाओं की एक-एक गतिविधि को ध्यान से देखा। काफी मशक्कत के बाद यह गीत पूरा हुआ। पंडित नरेंद्र शर्मा द्वारा लिखा गया यह गीत लता जी के बेहतर गीतों में से एक है।   
            अंत में चलते -चलते ..............

मानती हूँ 
चल रही है आंधी 
तेज -तेज 
बहुत तेज 
उड़ जायेंगे 
टीन और छप्पर 
चुनरी और चद्दर
परवाह नहीं  
बस बचाना चाहती हूँ 
तुलसी के बिरवे को 
गर वो बच गया 
तो 
सब बच जाएगा 

अनुराधा गुप्ता 
गृहणी (दिल्ली )

समस्त चित्र गूगल से साभार 
डिस्क्लेमर .... यह जानकारी गूगल से विभिन्न श्रोतों से प्राप्त की है ,जिन औषिधिय प्रयोगों का वर्णन किया है उसे सही श्रोतो से एकत्र किया है फिर भी योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य ले ले 
         

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