सोमवार, 5 जनवरी 2015

पति का गाडी प्रेम (व्यंग )

                                     पति  का गाडी प्रेम 
                                (एक दुखी पत्नी का हलफनामा )  

पुरुषों का अपनी गाडी से प्रेम सर्व -विदित है पर इतना! की गाडी को पत्नी से ज्यादा चाहने लगे क्या जायज है ?इतिहास गवाह है एक सौतन कितना दर्द देती है.... यह एक नारी ही जानती है ………सौतन तो सौतन ही है फिर चाहे वो एक गाडी ही क्यों न हो  …………… अगर पति अपनी पत्नी से ज्यादा अपनी गाडी से प्रेम करने लगे जिसे  बेचारी पत्नी के दिल पर क्या बीतेगी  ?माना की इसे किसी स्त्री विमर्श में स्थान नहीं मिलेगा पर नारी का दर्द तो नारी का दर्द है  ………… भले ही इसके लिए साहित्य में "गाडी विमर्श"  नाम से नया विमर्श स्थापित करना पड़े ................ पर फिलहाल तो एक दुखी पत्नी आप सब से दुआओं के लिए गुहार लगा रही है ……… क्या आप की दुआएं उसके साथ हैं 



    

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