सोमवार, 25 सितंबर 2017

बीस पैसा








©किरण सिंह 
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हमारे लिए गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन तथा सर्दियों में समुद्री इलाका हमारा ननिहाल या ददिहाल ही हुआ करता था! जैसे ही छुट्टियाँ खत्म होती थी हम अपने ननिहाल पहुंच जाया करते थे जहाँ हमें दूर से ही देख कर ममेरे भाई बहन उछलते - कूदते हुए तालियों के साथ गीत गाते हुए ( रीना दीदी आ गयीं...... रीना दीदी........) स्वागत करते थे कोई भाई बहन एक हाथ पकड़ता था तो कोई  दूसरा और हम सबसे पहले  बाहर बड़े से खूबसूरत दलान में बैठे हुए नाना बाबा ( मम्मी के बाबा ) को प्रणाम करके उनके द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देकर अपनी फौज के साथ घर में प्रवेश करते थे!

एक लघु कहानी -----सम्मान


आज साहित्य के क्षेत्र में सम्मान समारोह आम हो गए हैं | कोई कितना भी कलम घिस ले पर सम्मान के लिए जुगाड़ चाहिए | जगह - जगह बटते सम्मानों की हकीकत का पर्दाफाश  करती लघुकथा ... सम्मान 
संजय कुमार गिरि

एक व्यक्ति :सम्मान ले लो .....सम्मान ले लो भाई ...सम्मान !
दोसरा व्यक्ति :अरे भाई ये आप क्या बेच रहे हो ?
पहला व्यक्ति :जी सम्मान बेच रहा हूँ !
दूसरा व्यक्ति :सम्मान ?ये सम्मान क्या होता है ?
पहला व्यक्ति :भाई क्या आपने "साहित्य सम्मान "नहीं सुना कभी ?
दूसरा व्यक्ति :भाई ये सम्मान तो "हिंदी साहित्य" की सेवा करने वाले साहित्यकार व्यक्ति को ही मिलता है न ?

शनिवार, 23 सितंबर 2017

“परिस्थिति “





रोचिका शर्मा
       चेन्नई

अपनी बेटी के बी. ए. अंतिम वर्ष में दाखिला लेते ही मैने उसके लिए योग्य वर तलाशना शुरू कर दिया और बेटी को बोला " थोड़ा घर का काम-काज भी सीखो, सिलाई , कढ़ाई और साथ-साथ में ब्यूटी-पार्लर का कोर्स भी कर लो । लड़का योग्य हो तो उसके परिवार वाले लड़की में भी तो कुछ गुण देखेंगे ना । वैसे तो हम अपने व्यवसाय वाले लेकिन लड़की नौकरी वाला लड़का चाहती थी सो नौकरी वाला लड़का ढूँढना शुरू किया । इधर बेटी ने भी पास के ब्यूटी-पार्लर में कोर्स करना शुरू कर दिया ।

नादान सी वो लड़की - प्रिया मिश्रा की कवितायें


प्रिया मिश्रा
सतना म.प्र.



1)नादान सी वो लड़की 

कब हो गई सयानी
नादान सी वो लड़की
पत्तो से खेलती थी
पेड़ो पे झूलती थी
हर रोज थी जो गढ़ती
कोई नई सी कहानी
कब हो गई सयानी?

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

लगाव (लघु कहानी)



सविता मिश्रा 
"बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!" कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज देखो खंडहर में तब्दील हो गया|"
"हा बुढिया चारो लड़कों ने तो अपने-अपने आशियाने बगल में ही बना लिए है! वह क्यों भला यहाँ की देखभाल करते|"
"रहते तो देखभाल करते न" चारो तो लड़लड़ा अलग-अलग हो गये|"

नवरात्रि पर ले बेटी बचाओ , बेटी पढाओ का संकल्प


किरण सिंह 

हिन्दू धर्म में व्रत तीज त्योहार और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। हर वर्ष चलने वाले इन उत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों को हिन्दू धर्म का प्राण माना जाता है  इसीलिये अधिकांश लोग इन व्रत और त्योहारों को बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं।व्रत उपवास का धार्मिक रूप से क्या फल मिलता है यह तो अलग बात है लेकिन इतना तो प्रमाणित है कि व्रत उपवास हमें संतुलित और संयमित जीवन जीने के लिए मन को सशक्त तो करते ही हैं साथ ही सही मायने में मानवता का पाठ भी पढ़ाते हैं!

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

देवी को पूजने वालों देवी को जन्म तो लेने दो



संजीत शुक्ला
नवरात्रों के दिन चल रहे हैं | हर तरफ श्रद्धालु अपनी मांगों की लम्बी कतार लिए देवी के दर्शन के लिए घंटों कतार में लगे रहते हैं | हर तरफ जय माता दी के नारे गूँज रहे हैं , भंडारे हो रहे हैं , कन्या पूजन हो रहा है | और क्यों न हो जब माँ सिर्फ माँ न हो कर शक्ति की प्रतीक हैं |परंपरा बनाने वालों ने सोचा होगा की शायद इस बहाने आम स्त्री को कुछ सम्मान मिले , उसके प्रति मर्यादित दृष्टिकोण हो | कन्या को पूजने वाले अपने घर की कन्याओं पर हो रहे अत्याचारों पर रोक लगाए | पर दुर्भाग्य ,” कथनी और करनी में बहुत अंतर है | आज भी आम स्त्री आम स्त्री ही है | ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मेरे हाथ में अखबार है | और उसमें छपी खबर मुझे विचलित कर रही है | खबर है दूसरी बार कन्या पड़ा करने के जुर्म में एक स्त्री को उसके ससुराल वालों ने इतना मारा की उसकी मृत्यु हो गयी |

रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन यानी तुष्टिकरण का मानसिक कैंसरवाद




रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) आज म्याँमार से भगाये गये लाखो लाख रोहिंग्या मुसलमान इतने शरीफ़ और साधारण नागरिक वहाँ के नही रहे,अगर रहे होते तो उन्हें आज इस तरह के हालात से दो-चार न होना पड़ता और उन्हें सेना लगाकर जबरदस्ती वहाँ से न निकाला गया होता।वहाँ के अमन चैन के जीवन मे ये आतंकियो की तरह अंदर ही अंदर एक दूषित इस्लाम( इस्लामी आतंकवाद ) का बारुद बिछाना शुरु कर दिये थे जिसकी परिणति या प्रतिफल उन्हें इस तरह भुगतना पड़ रहा हैं ।

बुधवार, 20 सितंबर 2017

जरूरी है की बचपन जीवित रहे न की बचपना



वंदना बाजपेयी
हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा  बचपन होता है | पर बचपन की खासियत जब तक समझ में आती है तब तक वो हथेली पर ओस की बूँद की तरह उड़ जाता है | जीवन की आपा धापी  मासूमियत को निगल लेती है | किशोरावस्था और नवयुवावस्था  में हमारा इस ओर ध्यान ही नहीं जाता |उम्र थोड़ी बढ़ने पर फिर से बचपन को सहेजने की इच्छा होती है |

घुटन से संघर्ष की ओर



पंकज 'प्रखर 
सरला अब उठ खड़ी हुई थी ये विवाह उसके माता-पिता और गर्वित के माता-पिता की ख़ुशी से हुआ था| लेकिन न जाने क्यों गर्वित उससे दुरी बनाये रखता था न जाने उसे स्त्री में किस सौन्दर्य की तलाश थी ये सोचकर उसके माथे पर दुःख की लकीरें उभर आई | पति का उसके प्रति यह व्यवहार, ताने, व्यंग्य, कटूक्तियों की मर्मपीड़क बौछार सुनते- सुनते उसका अस्तित्व छलनी हो गया था।

एक माँ से मिले हो ?- रश्मि प्रभा जी की पांच कवितायें


वरिष्ठ लेखिका रश्मि प्रभा जी की कलम में जादू है | उनके शब्द भावनाओं के सागर में सीधे उतर जाते हैं | आज हम रश्मि प्रभा जी की पांच कवितायें आपके लिए ले कर आये हैं जो पाठक को ठहर कर पढने पर विवश कर देती हैं |

एक माँ से मिले हो ?


तुम एक स्त्री से अवश्य मिले होगे 
उसके सौंदर्य को आँखों में घूँट घूँट भरा भी होगा 
इससे अलग
क्या तुम सिर्फ और सिर्फ 
एक माँ से मिले हो ?
उसकी जीवटता,

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

श्राद्ध पक्ष : उस पार जाने वालों के लिए श्रद्धा व्यक्त करने का समय


वंदना बाजपेयी

  हिन्दुओं में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है | हर साल भद्रपद शुक्लपक्ष पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के काल को श्राद्ध पक्ष कहा जाता है |  पितृ पक्ष के अंतिम दिन या श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को  महालय भी कहा जाता है | इसका बहुत महत्व है| ये दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन्हें अपने पितरों की पुन्य तिथि का ज्ञान नहीं होता वो भी इस दिन श्रद्धांजलि या पिंडदान करते हैं |अर्थात पिंड व् जल के रूप में अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं | हिन्दू शस्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में यमराज सभी सूक्ष्म शरीरों को मुक्त कर देते हैं | जिससे वे अपने परिवार से मिल आये व् उनके द्वरा श्रद्धा से अर्पित जल और पिंड ग्रहण कर सके |श्राद्ध तीन पीढ़ियों तक का किया जाता है |  

अम्माँ




रश्मि सिन्हा 
अम्माँ नही रही। आंसू थे कि रुकने का नाम नही ले रहे थे।
स्मृतियां ही स्मृतियां, उसकी अम्माँ, प्यारी अम्माँ ,स्मार्ट अम्माँ। कब बच्चों के साथ अंग्रेजी के छोटे मोटे वाक्य बोलना सीख गई पता ही नही चला।

सोमवार, 18 सितंबर 2017

बेटी के बल्ले ने बनाए रिकाॅर्ड-- हरमनप्रीत कौर, महिला क्रिकेटर



प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी
संकलन: प्रदीप कुमार सिंह
            पंजाब प्रांत का एक छोटा सा नगर है मोगा। यहां के बाशिंदे हरमिंदर भुल्लर को बास्केट बाॅल का बड़ा शौक था। बचपन में उन्होंने स्कूल टीम में खेला भी, मगर खेल को करियर बनाने की उनकी तमन्ना अधूरी रह गई। फिर उन्हें एक बड़े वकील के दफ्तर में मुंशी की नौकरी मिल गई। कुछ दिनों के बाद ही मोगा की रहने वाली सतविंदर से उनकी शादी हो गई। परिवार बस गया और जिंदगी चल पड़ी। घर की जिम्मेदारियों के बीच बास्केट बाॅल का बुखार फीका पड़ने लगा। अब यह साफ हो चुका था कि वह खिलाड़ी नहीं बन सकते।

जापानी तेल लगाओ----राधे माँ




रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)
तुम भी अब स्वर्ण-भस्म और शीलाजीत सी------- कोई दवाई खाओ---राधे माँ। बर्दाश्त नही हो रहा आशाराम और राम-रहिम से, स्याह कोठरी का खालीपन, किसी बगल की बैरक मे कैसे भी हो------- तुम आ जाओ--राधे माँ।