रविवार, 20 अगस्त 2017

हाय GST (वस्तु एंव सेवा कर)


(हास्य-व्यंग्य)
अशोक परूथी ‘मतवाला’

आजकल जी. एस. टी.  यानि वस्तु एंव सेवा कर को लेकर भारत में जनता ने दंगा-फसाद किया हुआ है औरकुछ लोग  समाज में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं! इस कर को लेकर पानी के गिलास के साथ भी लोगों की रोटी इनके हलक से नीचे नहीं उतर रही ! सरकार ने इस कर का नाम सोच समझ कर रखा है - वस्तु एंव सेवा कर.

संवेदनशील समाज : अपने लिए जिए तो क्या जिए





- प्रदीप कुमार सिंह पाल’, 
शैक्षिक एवं वैश्विक चिन्तक
रोज के अख़बारों में न जाने कितनी खबरें ऐसी होती हैं जहाँ संवेदनहीनता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है | क्या आज हम सब संवेदनहीन हो गए हैं ? हमारे पास दूसरों  की मदद करने का समय ही नहीं है या हम करना ही नहीं चाहते ? क्या आज  का जमाना ऐसा हो गया है जो " मेरा घर मेरे बच्चो में सिमिट गया है |कहीं न कहीं हम सब पहले की तरह मिलजुल कर रहना चाहते हैं | एक संवेदनशील समाज चाहते हैं | पर हम सब चाहते हैं की इसकी शुरुआत कोई दूसरा करे | पर हर अच्छे काम की पहल स्वयं से करनी पड़ती है | एक बेहतर समाज निर्माण के लिए हर व्यक्ति के सहयोग की आवश्यकता होती है | 

शनिवार, 19 अगस्त 2017

सावधान ! आप कैमरे की जद में हैं





अर्चना बाजपेयी

रायपुर (छत्तीस गढ़ )  
 क्लिक , क्लिक , क्लिक ... हमारा स्मार्टफोन यानी हमारे हाथ में जादू का पिटारा | जब चाहे , जहाँ चाहे सहेज लें यादों को | कोई पल छूटने न पाए , और हम ऐसा करते भी हैं | माँल  में गए तो चार साड़ियों की फोटो खींच भेज दी सहेलियों को व्हाट्स एप पर | तुरंत सबकी राय आ गयी | खुद को भी फैसला लेने में आसानी हुई | ये तस्वीरे हम खुद खींचते हैं अपनी सुविधा से अपनी मर्जी से | पर अगर यही काम कोई दूसरा करे बिना हमारी जानकारी के बिना हमारी मर्जी के तो ? 

मनोबल न खोएँ





         हम अपने जीवन में अनेक सपने सजाते हैं | निरंतर अनेक इच्छाएँ पैदा करते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए बड़े-बड़े लक्ष्य बनाते हैं | अपने इन्हीं लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनेकानेक योजनाएँ बनाते हैं और जी जान से जुट जाते हैं किन्तु विडंबना ये है कि अक्सर हम किसी भी काम के पूरा होने में अधिक समय लगता देखकर निराश हो उठते हैं और अपनी उन योजनाओं को बीच में ही छोड़ देते हैं | कहीं न कहीं हम नकारात्मकता से भर उठते हैं और अपने समस्त प्रयास बंद कर देते हैं | यह निराशा और नकारात्मक सोच ही हमारी सफलता की राह की सबसे बड़ी बाधा है | काफी साल पहले मैंने एक किस्सा सुना था जो कुछ यूँ था –

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

अपनी-अपनी आस


शशि बंसल
भोपाल ।
लघुकथा )
" सुनो जी ! इस बार नए साल की पार्टी के लिए मुझे हीरों का हार चाहिए ही चाहिए ।पूरी कॉलोनी में एक मैं ही हूँ , जिसके पास एक भी ढंग का हार नहीं ।"
"
जब तुमने निर्णय ले ही लिया है तो कोई इनकार कर सकता है भला ।सोच तो मैं भी रहा था , नई गाड़ी लेने की । तीन साल से एक ही गाड़ी चलाते-चलाते बोर हो गया हूँ । "
"
तो खरीद लीजिये न ।"

बदचलन



लघुकथा 
पूनम पाठक
इंदौर ( म. प्र. )
सब तरफ चुप्पी छाई थी . कहीं कोई आवाज नहीं थी सिवाय उन लड़कों के भद्दे कमेंट्स की जो उस बेचारी को सुनने पड़ रहे थे . लेकिन किसी की हिम्मत उन लड़कों से भिड़ने की नहीं थी लिहाज़ा सभी मूकदर्शक बन चुपचाप तमाशा देख रहे थे . मैंने भी अपने काम से काम रखने वाली नीति अपनाते हुए मोबाइल पर अपनी निगाहें नीची कर ली थीं , कि तभी तड़ाक की आवाज ने जैसे सभी को जड़वत कर दिया . 

sarahah app : कितना खास कितना बकवास




अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब फेसबुक पर sarahah एप लांच हुआ और देखते ही देखते कई लोगों ने डाउनलोड करना शुरू कर दिया | मुझे भी अपने कई सहेलियों की वाल पर sarahah एप दिखाई दिया और साथ ही यह मेसेज भी की यह है मेरा एक पता जिसपर आप मुझे कोई भी मेसेज कर सकते हैं | वो भी बिना अपनी पहचान बाताये | आश्चर्य की बात है इसमें मेरी कई वो सखियाँ भी थी जो आये दिन अपनी फेसबुक वाल पर ये स्टेटस अपडेट करती रहती थी की ,मैं फेसबुक पर लिखने पढने के लिए हूँ , कृपया मुझे इनबॉक्स में मेसेज न करें | जो इनबॉक्स में बेवजह आएगा वो ब्लाक किया जाएगा | अगर आप कोई गलत मेसेज भेजेंगे तो आपके मेसेज का स्क्रीनशॉट शो किया जाएगा , वगैरह , वगैरह | मामला बड़ा विरोधाभासी लगा , मतलब नाम बता कर मेसेज भेजने से परहेज और बिना नाम बताये कोई कुछ भी भेज सकता है | जो भी हो इस बात ने मेरी उत्सुकता सराह एप के प्रति बढ़ा दी | तो आइये आप भी जानिये सराह ऐप के बारे में ," की ये कितना ख़ास है और कितना बकवास है |

गुरुवार, 17 अगस्त 2017

क्या आत्मा पूर्वजन्म के घनिष्ठ रिश्तों की तरफ खिंचती है ?


लेखिका – श्रीमती सरबानी सेनगुप्ता
जीवन भर दौड़ने भागने के बाद जब जीवन कि संध्या बेला में कुछ पल सुस्ताने का अवसर मिलता है तो न जाने क्यों मन पलट पलट कर पिछली स्मृतियों में से कुछ खोजने लगता है | ऐसी ही एक खोज आज कल मेरे दिमाग में चल रही है , जो मुझे विवश कर रही है यह सोचने को कि ईश्वर कि बनायीं इस सृष्टि में , जन्म जन्मांतर के खेल में कुछ कड़ियाँ ऐसी जरूर हैं जो हमें पिछले जन्मों के अस्तित्व पर सोचने पर विवश कर देती हैं |

बुधवार, 16 अगस्त 2017

फौजी की माँ


उत्पल शर्मा "पार्थ" 
राँची -झारखण्ड
वक़्त हो चला था परिवार वालों से विदा लेने का, छुट्टी ख़त्म हो गयी थी। घर से निकलने ही वाला था सहसा सिसकियों की आवाज से कदम रुक गए, मुड़ कर देखा तो बूढी माँ आँचल से अपने आंसुओं को पोछ रही थी। 

सूट की भूख


 सरबानी सेनगुप्ता  
आज जहाँ भी जाओ लेडीज सूट और कुर्तों का बोलबाला है | चाहे वो मॉल  हो या पटरी पर लगी दुकानें | सूट की भूख दिन को ही नहीं रात को भी औरतों को जगाये रखती है | यहाँ मैं अपने मोहल्ले का जिक्र कर रही हूँ |

हे श्याम सलोने



©किरण सिंह
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हे श्याम सलोने आओ जी 
अब तो तुम दरस दिखाओ जी 

राह निहारे यसुमति मैया 
तुम ठुमक ठुमक कर आओ जी 

आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी

कोई तो हो जो सुन ले



कभी - कभी हमें एक तर्क पूर्ण दिमाग के जगह एक खूबसूरत दिल की जरूरत होती है जो हमारी बात सुन ले - अज्ञात 
                                 उफ़ !कितना बोलते हैं सब लोग , बक - बक , बक -बक | चरों तरफ शोर ही शोर | ये सच है की हम सब बहुत बोलते हैं | पर सुनते कितना हैं ?हम सुबह से शाम तक कितने लोगों से कितनी साड़ी बातें करते हैं | पर  कभी आपने गौर किया है की जब मन का दर्द किसी से बांटना चाहो तो केवल एक दो नाम ही होते हैं | उसमें से भी जरूरी नहीं की वो पूरी बात सुन ही लें | 

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस व् जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं



अद्भुत संयोग है की इस बार जन्माष्टमी व् स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जा रहा है | लीलाधर , नन्द नंदन योगेश्वर श्रीकृष्ण जिन्होंने जन्म के साथ ही परतंत्रता के खिलाफ युद्ध की शुरुआत कर दी थी | उन्होंने अपने जीवन पर्यंत उस समय प्रचलित अनेकों बन्धनों अनेकों कुरीतियों व् परम्पराओं को तोडा व् उनसे आज़ादी दिलवाई | आज ये अनुपम संयोग संकेत दे रहा है की भले ही सन १९४७ में हमें स्वतंत्रता मिल गयी हो पर आज़ादी की लड़ाई अभी बाकी है | ये लड़ाई किसी विदेशी आक्रांता के खिलाफ नहीं वरन अपने ही देश में व्याप्त भ्रष्टाचार , धर्मिक विद्वेष व् सामाजिक कुरीतियों के साथ हैं | जिनसे हमें स्वयं ही अपने - अपने स्तर पर लड़ना है और स्वतंत्र होना है |
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस व् जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

देश भक्ति के गीत




डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, देहरादून, उत्तराखंड
जय गान करें
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भारत का जय गान करें
आओ हम अपने भारत की
नई तस्वीर गढ़ें
भारत का....
अपनी कीमत खुद पहचाने
हम क्या हैं खुद को भी जाने

पिजड़े से आजादी

यूँही नही मिली एै दोस्त-------------- गुलाम भारत के पिजड़े की चिड़ियाँ को आजादी। यूँही नही इसके पर फड़फड़ाये खुले आकाश----- बहुत तड़पी रोई पिजड़े मे इसके उड़ने की आजादी।